वैश्विक स्थिति एक साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की प्रासंगिकता के साथ-साथ इसकी मौजूदा कमियों को भी उजागर करती है

Question – कोविड –19 के  कारण विकसित वैश्विक स्थिति एक साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की प्रासंगिकता के साथ-साथ इसकी मौजूदा कमियों को भी उजागर करती है। चर्चा कीजिए। 31 January 2022

AnswerCOVID-19 महामारी के प्रकोप के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से सक्रिय प्रतिक्रिया की आवश्यकता है, क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दों के निर्देशन और समन्वय के लिए जिम्मेदार है। समकालीन परिदृश्य में WHO की प्रासंगिकता इस प्रकार दिखाई देती है:

  • अंतरराष्ट्रीय चिंता या महामारी से संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणाः यह सटीक सूचना प्रादान करके, खतरनाक मिथकों को तोड़कर, स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा करके इत्यादि के द्वारा एकीकृत एवं समयबद्ध अंतरराष्ट्रीय अनुक्रिया हेतु एक केंद्रीय समन्वय निकाय के रूप में कार्य करता है।
  • रणनीतिक तैयारी एवं अनुक्रिया योजनाः यह दिशानिर्देश जारी करके उन देशों को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल की तैयारी और अनुक्रिया में सहायता प्रदान करता है, जिन देशों को ऐसा कदम उठाने की आवश्यकता है और उन्हें इससे निपटने के लिए संसाधनों की आवश्यकता है।
  • अनुसंधान एवं विकास को गति प्रदान करना: WHO द्वारा टीका निर्माण की सर्वाधिक सफलता की संभावना वाले देशों/संगठनों की प्रगति का मूल्यांकन करने या उन टीकों के वैश्विक नैदानिक परीक्षण हेतु, टीका वैज्ञानिकों के बहुराष्ट्रीय संगठन जैसे Solidarity Vaccine Trial का गठन किया गया है।
  • महत्वपूर्ण आपति सुनिश्चित करनाः परीक्षण, उपचार एवं टीकों के विकास, उत्पादन एवं उपलब्धता में तीव्रता लाने हेतु WHO ने अपने एक्सेस टु COVID 19 टूल (Access to Covid 19 Tools- ACT) एसीलिरेटर’ कार्यक्रम के द्वारा सरकारों, वैज्ञानिकों, नागरिक समाज, व्यवसायियों एवं स्वास्थ्य संगठनों को एक मंच पर एकजुट किया है।
  • जोखिम वाले निर्धन और संवेदनशील देशों की सहायताः यह टीकों तक न्यायोचित पहुंच सुनिश्चित करने और विशेषकर ख़राब स्वास्थ्य व्ययस्था वाले देशों की सहायता करने के उद्देश्य से ‘कोविड 19 एकजुटता अनुक्रिया कोष’ (Covid 19 Solidarity Response Fund) जैसे विशेष कोष के गठन की दिशा में कार्य कर रहा है।

हालाँकि, वर्तमान संकट ने WHO में गंभीर संरचनात्मक बाधाओं और कमजोरियों को भी उजागर किया है, जैसे:

  • सीमित धन और जानलेवा महामारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का मार्गदर्शन करने की क्षमता की कमी के साथ, निकाय को संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे प्रभावशाली सदस्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • इसके पास केवल अनुशंसात्मक शक्तियाँ हैं और इसके पास अपने सदस्यों को बाध्य करने और प्रतिबंधित करने की शक्ति नहीं है।
  • दुर्बल रूप से समन्वित संरचना, जिसके कारण इस निकाय ने चीन में प्रकोप द्वारा उत्पन्न हुए संकट के स्तर को सार्वजनिक स्तर पर स्वीकार करने में विलंब किया, साथ ही विश्व को सही समय पर सचेत करने में विफल रहा जिससे कि विश्वभर के देशों में प्रभावी नीतियां कार्यान्वित की जा सकती थीं।

मतभेदों से परे जाकर, डब्ल्यूएचओ के सदस्यों को वर्तमान स्वास्थ्य संकट द्वारा प्रस्तुत अवसर का लाभ उठाना चाहिए। व्यापक वैश्विक शासन की संरचना को सुदृढ़ करने के लिए पुनर्विचार की आवश्यकता है। साथ ही दानदाताओं पर निर्भरता और कमजोर क्षमता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर संबोधित किया जाना चाहिए।

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