यूपीएससी में क्यों गिर रहा है हिंदी मीडियम का रिजल्ट ?

यूपीएससी में क्यों गिर रहा है हिंदी मीडियम का रिजल्ट ?

परीक्षा परिणाम के खराब होने के कई कारण हैं. इसके पीछे मुख्य कारण इंडिया और भारत के बीच बढ़ता गैप है । हिंदी आज भी भारत में अंग्रेजी से कहीं ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। लेकिन यह एलीट क्लास की भाषा नहीं है । यह ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों के साधारण जनों और वंचितों की भाषा है। हिंदी माध्यम के अभ्यार्थी अंग्रेजी माध्यम के अभ्यार्थी की तुलना में आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक तीनों ही दृष्टियों में पिछड़े हैं ।

यहा मामला हिंदी अंग्रेजी भाषा का उतना नहीं है, जितना कि गरीब-अमीर, गांव-शहर, सरकारी और कन्वेंट स्कूल के भेद का है। कुल मिलाकर यह मुकाबला गैर बराबरी का है तो नतीजे का अनुमान आप लगा ही सकते हैं। आप पिछले कई वर्षों का रिजल्ट देखिए ।ज्यादातर टॉपर दिल्ली जैसे बड़े शहरों से ही निकल रहे हैं और उनकी पारिवारिक, आर्थिक स्थिति भी काफी बेहतर है।

अतः उक्त आधारो पर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने आते ही जिनके कारण हिंदी माध्यम का परिणाम ख़राब हुआ हैं

  1. प्रारंभिक जीवन और परिवारिक पृष्टभूमि
  2. अकादमिक छात्र जीवन
  3. तैयारी के दौरान समस्या
  • प्रारंभिक परीक्षा में
  • मुख्य परीक्षा में
  • इंटरव्यू में

प्रारंभिक जीवन और परिवारिक पृष्टभूमि

  • अच्छी शिक्षा का आभाव
  • सुबिधा की कमी
  • कभी कभी जानकारी का अभाव
  • छात्र का प्रदेश परीक्षा बोर्ड का होना और UPSC का Ncert आधारित होना
  • आर्थिक कमजोरी

अकादमिक छात्र जीवन

  • अकादमिक छात्र जीवन में शिक्षा व्यवस्था की लचर हालत
  • पास कल्चर ( शिक्षा का अर्थ केवल डिग्री लेने तक सिमित रह जाती हैं
  • नवचार की कमी ( बदलते परिवेश में जहा इन्टरनेट की उपलब्धता का प्रयोग सही अर्थो में नहीं किया जा रहा हैं
  • अकादमिक स्तर की शिक्षा और प्रतिस्पर्द्धा के वातावरण का आभाव भी इसके लिये जिम्मेदार है

संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी के दौरान आने वाली समस्या

  • प्रारंभिक परीक्षा में

जैसा हम जानते हैं कि प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न का जो स्तर होता हैं उसके लिये एक समग्र ज्ञान की जरूरत होती हैं , जिसके लिये तीनो स्तरों की तैयारी एक साथ करनी अवश्यक होती हैं –

अतः इस परीक्षा में हिंदी माध्यम के लोगो का प्रतिशत कम रहता हैं , इसके मुख्य कारण निम्न है

  • CSAT
  • स्टडी मटेरियल की कमी ( जैसे करंट अफेयर्स , economy और अन्य विषय जिसमे डेली बेसिस पर परिवर्तन होता रहता हैं
  • Mock test को हल न करना
  • Previous year question paper आधारित तैयारी न करना
  • कोचिंग क्लासेज में (प्री+ mains ) को अलग पढाना
  • कुछ ही विषय में ज्यादा ध्यान देना आदि कई कारण हैं , जिनके आधार पर प्रारंभिक परीक्षा में इनका चयन नही हो पता हैं
  • मुख्य परीक्षा में

मुख्य परीक्षा में हुए परिवर्तन से हिंदी माध्यम के अभ्यार्थी कभी भी IAS की परीक्षा में लाभ कि स्थिति में नहीं रहे हैं। वे हमेशा हाशिए पर रहे हैं।  विगत 5 वर्षों से सफलता की दर में कमी आने का कारण यह है कि परीक्षा का पैटर्न तेजी से बदला है और इस स्थिति से हिंदी माध्यम के अभ्यार्थी निपटने में विफल रहे हैं।

अतः कारणों को देखा जाये तो मुख्य परीक्षा में असफलता के मुख्य करना है –

  1. सही कोचिग संस्थान का चयन ( जो की नए पैटर्न पर शिक्षा मुहैया करवाती हो )
  2. मुख्य परीक्षा के प्रश्नों के अभ्यास न करना
  3. उत्तर लेखन का सही मार्गदर्शन न मिलना
  4. किस प्रकार से एक प्रश्न को लिखा जाये उसका अभाव
  5. मुख्य परीक्षा का दूसरा पहलु हैं , दोनों भाषाओ के व्याकरण में ( अग्रेजी की अपेक्षा हिंदी में अपनी बात को कहने के लिये आपको ज्यादा शब्दों का प्रयोग करना पड़ता है, जो आपके कीमती शब्द और ऊर्जा को वर्वाद करता है जिसके कारण आप अंग्रेजी माध्यम की तुलना कम चीजों को कवर कर पाते हैं जिसके कारण मुख्य परीक्षा में अंकों कम हो जाते हैं
  6. सफल लोगो के मार्गदर्शन का आभाव (IIT आदि संस्थाओं के छात्र इसलिए बेहतर स्थिति में रहते हैं, क्योंकि उन्हें अपने सीनियर्स का, जो कि सिविल सेवा के लिए चयनित हो चुके हैं, का सहयोग भी मिल जाता है।)
  7. हिंदी माध्यम की कोचिंग में छात्रों की संख्या ज्यादा होना (अंग्रेजी माध्यम की दिल्ली के करोलबाग स्थित सबसे बड़ी कोचिंग में भी एक बैच में अधिकतम 200 के आस-पास स्टूडेंट होते हैं। लेकिन मुखर्जी नगर में हिंदी मीडियम की कोचिंग में एक बैच में 700 से 800 छात्र तक पढ़ रहे हैं। इतने छात्रों के बीच प्रवचन हो सकता है पढ़ाई नहीं। यह अंतर सिद्ध करता है कि हिंदी माध्यम में भेड़चाल की प्रवृति अपेक्षाकृत ज्यादा है। )
  8. अंग्रेजी माध्यम के अभ्यार्थियों की रणनीति त्रिस्तरीय होती हैं

पहला चरण 

इस चरण में वे अपनी कमजोरियों को दूर करते हैं । NCERT जैसी मानक पुस्तकों को पढ़कर अपनी स्कूली शिक्षा की कमियों को दूर करें। और फिर उसी पर आधारित प्री और mains के प्रश्नों को हल करते हैं और फिर अपनी तैयरी का दूसरा चरण शुरु करते हैं । परन्तु हिंदी माध्यम में अक्सर इसका आभाव देखने को मिलता हैं

दूसरा चरण

IIT और मैनेजमेंट के छात्र जो की अच्छी पुस्तकों और पाठ्य सामग्री का प्रयोग करते हैं इंटरनेट जैसी नई तकनीकों का भी प्रयोग करते हैं, परन्तु हिंदी माध्यम के छात्र इसका उपयोग इनकी अपेक्षा कम करते हैं

तीसरा चरण

मुख्य परीक्षा के तीसरे चरण में अंग्रेजी माध्यम के अभ्यार्थियों ग्रुप परिचर्चा करते हैं

बिभिन्न वेबसाइट का प्रयोग करते हैं और उत्तर लेखन का अभ्यास करते है , इसका सबसे बड़ा उदा. अनु कुमारी (आईएस रैंक 1 ) हैं , जिन्होंने अपनी तैयारी केवल इन्टरनेट के माध्यम से की है

इंटरव्यू में

अंतिम चयन के लिए साक्षात्कार बहुत ही महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम के रूप में होता है

साक्षात्कार में दो चीजें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं

  • सीधा वार्तालाप ( बोर्ड और अभ्याथी के मध्य )
  • प्राकृतिक भाषा शैली और विचारो का अदान – प्रदान

स्थानीय भाषा हिंदी या हिंदी भाषा इंटरव्यू के लिये उपयोगी क्यों नहीं ?

  • साक्षात्कार करने वालो में अधिकतर लोग बड़े पदों पर आसीन अधिकारी होते हैं जिनका उनके प्रोफेसनल लाइफ में ज्यादा हिंदी भाषा का प्रयोग कम ही होता हैं , जिससे उनको हिंदी माध्यम में बात करना असुबिधा जनक लगता हैं और यह हिंदी या अन्य माध्यम के लिये सहायक सिद्ध नहीं होता हैं ?

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