UN-FAO द्वारा ‘अर्बन फॉरेस्ट्री एंड अर्बन ग्रीनिंग इन ड्राई लैंड्स’ रिपोर्ट जारी

UN-FAO द्वारा अर्बन फॉरेस्ट्री एंड अर्बन ग्रीनिंग इन ड्राई लैंड्स रिपोर्ट जारी

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (UN-FAO) ने ‘अर्बन फॉरेस्ट्री एंड अर्बन ग्रीनिंग इन ड्राई लैंड्स’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है।

यह रिपोर्ट FAO के ‘ग्रीन अर्बन ओएसिस प्रोग्राम के फ्रेमवर्क के तहत तैयार की गई है। यह प्रोग्राम जलवायु, स्वास्थ्य, खाद्य और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए शुष्क भूमि वाले शहरों की प्रतिरोधक क्षमता में सुधार करने के लिए लॉन्च किया गया था।

यह प्रोग्राम FAO की ग्रीन सिटीज पहल में सहायता करता है । इस पहल को वर्ष 2020 में लॉन्च किया गया था ।

ग्रीन सिटीज पहल का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में दुनिया भर के कम-से-कम 100 शहरों में नगरीय और परिनगरीय आबादी की आजीविका में सुधार करना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है ।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

विश्व के लगभग 35% सबसे बड़े शहर शुष्क क्षेत्रों में स्थित हैं। इनमें काहिरा, मैक्सिको सिटी और नई दिल्ली जैसे बड़े शहर भी शामिल हैं।

वर्तमान में अपने विस्तार के साथ ये शहर सामाजिक, पर्यावरणीय और आर्थिक संकट के उच्च जोखिम का सामना कर रहे हैं।

सीमित मात्रा में होने वाली वर्षा तथा जलापूर्ति शुष्क भूमि पर तेजी से हो रहे शहरीकरण के नकारात्मक प्रभावों में और वृद्धि करती हैं। इससे सीमित संसाधनों का अत्यधिक दोहन होता है तथा भूमि क्षरण में वृद्धि होती है ।

शुष्क भूमि वाले कई शहरों की योजनाओं में शहरी वानिकी और हरियाली संबंधी रणनीतियों को अभी तक पूरी तरह से शामिल नहीं किया गया है।

रिपोर्ट में की गई सिफारिशें

भू – परिदृश्य स्तर पर:  हरे-भरे स्थानों के विकास के लिए योजना बनाई जानी चाहिए और ऐसी जगहों का रखरखाव किया जाना चाहिए।

साथ ही, ऐसी जगहों की हरियाली के लिए ऐसे वृक्षों व वनस्पतियों का चयन किया जाना चाहिए, जो स्थानीय पर्यावरण और शहर के परिदृश्य के अनुकूल हों ।

सामुदायिक स्तर परः सामुदायिक भागीदारी और स्वामित्व की भावना को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। साथ ही, वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जानी चाहिए। पर्यावरण शिक्षा के माध्यम से क्षमता का निर्माण किया जाना चाहिए ।

सरकारी स्तर परः मजबूत नीतियां बनाई जानी चाहिए तथा शहरी हरियाली को संरक्षित किया जाना चाहिए।

शुष्क भूमि (Drylands) क्षेत्र ऐसे प्रदेश हैं, जहां शुष्कता सूचकांक 0.65 से अधिक नहीं होता है । शुष्कता सूचकांक, वार्षिक वर्षा और औसत संभावित वार्षिक वाष्पन—उत्सर्जन (evapotranspiration) का अनुपात है

शुष्क भूमि क्षेत्र, पृथ्वी की भू-सतह के 41% हिस्से में विस्तृत हैं। इन क्षेत्रों में लगभग 2 बिलियन लोग निवास करते हैं।

इनमें से लगभग 90% आबादी विकासशील देशों (मुख्य रूप से अफ्रीका और एशिया) में निवास करती है।

स्रोत – द हिन्दू

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