“स्टैंड अप इंडिया योजना” के पूरे हुए 6 वर्ष
5 अप्रैल 2022 को ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना ने छह साल पूरे किए हैं। 5 अप्रैल 2016 को, भारत सरकार द्वारा ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना (Stand Up India Scheme) शुरू की गई थी।
इस योजना की उपलब्धियां:
- इस योजना के तहत 33 लाख से अधिक नए रोजगार सृजनकर्ताओं और उद्यमियों को सहायता प्रदान की गई है।
- पिछले छह वर्षों में इस योजना के तहत 1 लाख से अधिक महिला उद्यमी लाभान्वित हुई हैं।
- इस योजना के तहत सरकार द्वारा 21 मार्च 2022 तक कुल 1,33,995 खातों में 30,160 करोड़ रुपये अनुमोदित किए गए हैं।
- कुल अनुमोदित खातों में से, अनुसूचित जनजाति के ऋणकर्ताओं के 6,435 खातों में 71 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे, तथा अनुसूचित जाति के ऋणकर्ताओं के 19,310 खातों में 3976.84 करोड़ रुपये मंजूर किए गए थे।
- खाता रखने वाली 1,08,250 महिला उद्यमियों को रु. 89 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
‘स्टैंड अप इंडिया’ स्कीम के बारे में:
- आर्थिक सशक्तिकरण के जमीनी स्तर पर उद्यमशीलता को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन हेतु 5 अप्रैल 2016 को ‘उतिष्ठ भारत’ योजना की शुरुआत की गई थी।
- इस योजना का लक्ष्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों जैसे सीमित सेवा लाभ प्राप्त करने वाले लोगों तक संस्थागत ऋण संरचनाओं का लाभ प्रदान करना है।
- इसके तहत, SIDBI और NABARD के कार्यालयों को ‘स्टैंड-अप कनेक्ट सेंटर’ (SUCC) के रूप में अभिहित किया जाएगा।
- योजना के तहत ऋण केवल ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए उपलब्ध कराया जाता हैं।
योजना का उद्देश्य:
इसका उद्देश्य, प्रत्येक बैंक शाखा द्वारा कम से कम एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमी को विनिर्माण, सेवा या व्यापार क्षेत्र में नई (ग्रीनफील्ड) परियोजना की स्थापना करने हेतु अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) से 10 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच बैंक ऋण प्रदान करना है।
योजना के अंतर्गत पात्रता:
- 18 वर्ष से अधिक आयु के अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति और / महिला उद्यमी।
- योजना के अंतर्गत ऋण सहायता केवल ग्रीनफील्ड परियोजना के लिए प्रदान की जाएगी।
- उधारकर्ता के लिए किसी भी बैंक अथवा वित्तीय संस्थान में ‘डिफ़ॉल्ट’ (बकाया) नहीं होना चाहिए।
- गैर-निजी उद्यमों के मामले में, कम से कम 51% हिस्सेदारी और नियंत्रण, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति और / महिला उद्यमी के पास होना चाहिए।
स्रोत –द हिन्दू