SIPRI ने वैश्विक हथियारों के हस्तांतरण पर नया डेटा जारी किया

SIPRI ने वैश्विक हथियारों के हस्तांतरण पर नया डेटा जारी किया

हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने वैश्विक हथियारों के हस्तांतरण पर नया डेटा जारी किया है

  • SIPRI स्वीडन स्थित एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है । यह संस्थान संघर्ष, युद्धास्त्र, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में अनुसंधान के प्रति समर्पित है। जारी किए गए डेटा के मुख्य निष्कर्ष
  • अमेरिका, पिछले पांच वर्षों से दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य साजो-सामान निर्यातक देश है। इसके बाद रूस और फ्रांस का स्थान है।
  • पिछले पांच वर्षों में वैश्विक हथियारों के आयात में भारत की हिस्सेदारी सबसे अधिक थी। भारत के बाद सऊदी अरब, कतर और ऑस्ट्रेलिया का स्थान है।
  • भारत को हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रूस था। हालांकि, भारत में कुल हथियार आयात में इसकी हिस्सेदारी में कमी आई है।
  • भारत के अन्य शीर्ष आपूर्तिकर्ता – फ्रांस, अमेरिका और इजरायल हैं ।
  • वर्ष 2013-17 और 2018-22 के बीच भारत की हथियार खरीद में 11 प्रतिशत की कमी आई थी। इसके प्रमुख कारण जटिल खरीद प्रक्रिया, हथियारों के आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने के प्रयास और आयात की जगह घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने का प्रयास हैं।

रक्षा क्षेत्र के स्वदेशीकरण के लिए की गई पहलें

  • रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) – 2020 के तहत घरेलू स्रोतों से रक्षा उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • सरकार समय–समय पर सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची (Positive Indigenisation Lists) की अधिसूचना जारी करती है। इसमें सूचीबद्ध सैन्य सामग्रियों के एक निश्चित समय-सीमा के बाद आयात पर प्रतिबंध होता है ।
  • स्वचालित मार्ग के तहत 74 प्रतिशत FDI की अनुमति दी गई है।
  • भारतीय उद्योग द्वारा रक्षा सामग्रियों के स्वदेशीकरण को सुविधा प्रदान करने के लिए SRIJAN पोर्टल को लांच किया गया है।
  • दो रक्षा औद्योगिक गलियारों की स्थापना की जा रही है। इनमें एक उत्तर प्रदेश में और एक तमिलनाडु में है।
  • मिशन डेफस्पेस (DefSpace); रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार ( IDEX) योजना आदि की शुरुआत की गई है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) :

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है जो युद्ध, आयुध, हथियार नियंत्रण व नि:शस्त्रीकरण में अनुसंधान के लिये समर्पित है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1966 में स्टॉकहोम (स्वीडन) में हुई थी।
  • यह नीति निर्माताओं, शोधकर्त्ताओं, मीडिया एवं जागरूक नागरिकों को पारदर्शी स्रोतों के आधार पर डेटा, डेटा विश्लेषण एवं सिफारिशें प्रदान करता है।

स्रोत – हिन्दुस्तान टाइम्स

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