शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी

शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी

हाल ही में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी की है।

  • एडवाइजरी के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को सभी कोचिंग संस्थानों / शैक्षणिक संस्थानों को निम्नलिखित निर्देश देने को कहा गया है:
  • ‘महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, निषेध और रोकथाम) अधिनियम, 2013’ का सख्ती से कार्यान्वयन सुनिश्चित करें । इस अधिनियम को प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट (PoSH) अधिनियम भी कहा जाता है।
  • मामलों की बेहतर रिपोर्टिंग के लिए जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करें ।
  • कोचिंग सेंटर के संचालन के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की जांच करें।
  • PoSH कानून महिलाओं के लिए कार्यस्थलों को सुरक्षित बनाने के लिए बनाया गया है। इस कानून में कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न वाले कृत्यों को रोकने, प्रतिबंधित करने और उनका निवारण करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं ।
  • यह कानून वर्ष 1997 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित विशाखा दिशा-निर्देशों पर आधारित है।

PoSH अधिनियम की विशेषताएं:

  • इसमें ‘कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न’ को परिभाषित किया गया है। साथ ही, शिकायतों के निवारण के लिए तंत्र की व्यवस्था की गई है।
  • पीड़ित महिला की व्यापक परिभाषा तय की गई है। इसके दायरे में सभी पीड़ित महिलाओं को शामिल किया गया है, भले ही उनकी आयु या रोजगार की स्थिति कुछ भी हो तथा चाहे वे संगठित या असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हों या सार्वजनिक या निजी क्षेत्र में। इसके अलावा क्लाइंट, कस्टमर और घरेलू सेवकों को भी शामिल किया गया है।
  • ऐसे प्रत्येक निजी या सार्वजनिक संगठन, जिनमें 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, उनमें एक आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य हैं।
  • 10 से कम कर्मचारियों वाले संगठनों या स्वयं नियोक्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा स्थानीय समिति का गठन किया जाएगा।

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के बारे में

  • भारत में महिलाओं की स्थिति पर गठित समिति (CSWI) ने लगभग पाँच दशक पहले शिकायतों के निवारण की सुविधा एवं महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास में तीव्रता लाने हेतु निगरानी कार्यों को पूरा करने के लिये ‘राष्ट्रीय महिला आयोग’ की स्थापना की सिफारिश की थी।
  • महिलाओं के लिये राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (1988-2000) सहित अन्य सभी समितियों और आयोगों ने महिलाओं के लिये एक शीर्ष निकाय के गठन की सिफारिश की।
  • राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 के तहत राष्ट्रीय महिला आयोग की स्थापना जनवरी 1992 में एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई थी।
  • आयोग का गठन 31 जनवरी 1992 को ‘जयंती पटनायक’ की अध्यक्षता में किया गया था।
  • आयोग में एक अध्यक्ष, एक सदस्य सचिव और पांच अन्य सदस्य होते हैं। NCW के अध्यक्ष को केंद्र सरकार द्वारा नामित किया जाता है।

स्रोत – द हिन्दू

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