RBI ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड करेगा जारी

RBI ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड करेगा जारी

हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने घोषणा की कि वह ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए संसाधन जुटाने के लिए सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) जारी करेगा।

प्रमुख तथ्य

  • RBI 25 जनवरी और 9 फरवरी, 2023 को प्रत्येक 4,000 करोड़ रुपये के 5 वर्षीय और 10-वर्षीय ग्रीन बॉन्ड की नीलामी करेगा और यह एक समान मूल्य की नीलामी होगी।
  • बॉण्ड से प्राप्त आय का उपयोग सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं में किया जाएगा जो अर्थव्यवस्था की कार्बन इंटेंसिटी को कम करने में मदद करती हैं।
  • कार्बन/एमिशन इंटेंसिटी को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की प्रत्येक यूनिट के बदले उत्सर्जित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की कुल मात्रा के रूप में परिभाषित किया गया है।
  • बिक्री की अधिसूचित राशि का पांच प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित होगा जैसा कि ‘भारत सरकार के दिनांकित प्रतिभूतियों और ट्रेजरी बिलों की नीलामी में गैर-प्रतिस्पर्धी बोली सुविधा के लिए योजना’ के तहत उल्लेखित है।

ग्रीन बांड की मुख्य विशेषताएं

  • ग्रीन बांड ऐसे वित्तीय प्रोडक्ट हैं जिनका उपयोग सरकार पर्यावरणीय सस्टेनेबिलिटी और क्लाइमेट एडेप्टिव को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों/योजनाओं के लिए संभावित निवेशकों से आवश्यक फंड जुटाने के लिए करती है।
  • पुनर्खरीद लेनदेन/repurchase transactions (रेपो) (रिज़र्व बैंक) निर्देश, 2018 में उल्लिखित नियमों और शर्तों के अनुसार सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड पुनर्खरीद लेनदेन (रेपो) के लिए पात्र होंगे।
  • एक पुनर्खरीद समझौता (REPO) एक अल्पकालिक सुरक्षित ऋण है। इसमें एक पक्ष दूसरे को सिक्युरिटीज बेचता है और उन प्रतिभूतियों को बाद में उच्च कीमत पर वापस खरीदने के लिए सहमत होता है।
  • सिक्युरिटीज कोलैटरल के रूप में कार्य करती हैं। सिक्युरिटीज की प्रारंभिक कीमत और उनके वापस खरीद मूल्य के बीच का अंतर ऋण पर चुकाया गया ब्याज है, जिसे रेपो दर (repo rate) के रूप में जाना जाता है ।
  • सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स को SLR (वैधानिक तरलता अनुपात) उद्देश्यों के लिए पात्र निवेश माना जाएगा।
  • वैधानिक तरलता अनुपात या SLR (Statutory Liquidity Ratio) डिपॉजिट का वह न्यूनतम प्रतिशत है जिसे एक वाणिज्यिक बैंक को नकदी, सोना या अन्य प्रतिभूतियों के रूप में बनाए रखना होता है।
  • यह मूल रूप से रिज़र्व आवश्यकता है जो बैंकों से ग्राहकों को ऋण देने से पहले अपने पास रखने की अपेक्षा की जाती है।
  • सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड द्वितीयक बाजार (secondary market) में व्यापार (ट्रेड) के लिए पात्र होंगे।

स्रोत – द हिन्दू

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