‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) टैग

रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (RFID) टैग

हाल ही में अमरनाथ तीर्थयात्रियों को ट्रैक करने के लिए ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ (Radio Frequency Identification – RFID) टैग का इस्तेमाल किया जा रहा है । इसका उपयोग तीर्थयात्रा के दौरान सुरक्षा खतरों में वृद्धि को देखते हुए लिया गया है।

RFID के बारे में:

  • ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन’ एक ‘टैग’ और ‘रीडर’ से बना एक ‘वायरलेस ट्रैकिंग सिस्टम’ है।
  • इसमें वस्तुओं या लोगों की जानकारी एवं पहचान को संप्रेषित करने के लिए रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है।
  • इसमें प्रयुक्त ‘टैग’ में एन्क्रिप्टेड जानकारी, सीरियल नंबर और संक्षिप्त विवरण दर्ज किए जा सकते हैं।

इसके दो प्रकार हैं  निष्क्रिय और सक्रिय RFID टैग:

  • सक्रिय आरएफआईडी (Active RFIDs) अपने स्वयं के उर्जा स्रोत, ज्यादातर बैटरी का उपयोग करते हैं।
  • निष्क्रिय आरएफआईडी (Passive RFIDs) को, पाठक के माध्यम से ‘विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा’ प्रसारण का उपयोग करके सक्रिय किया जाता है।

कैसे कार्य करता है

  • आरएफआईडी टैग कई अलग-अलग आवृत्तियों – निम्न आवृत्ति (low frequency), उच्च आवृत्ति (High Frequency – HF) और अल्ट्रा-उच्च आवृत्ति (ultra-high frequency – UHF) – पर रेडियो तरंगों का उपयोग करके ‘रीडर’ (पाठक) के साथ संवाद करने के लिए एक एकीकृत सर्किट और एंटीना का उपयोग करते हैं।
  • ‘टैग’ द्वारा ‘रेडियो तरंगों’ के रूप में वापस भेजे गए संदेश को डेटा में अनुवादित किया जाता है और इसका होस्ट कंप्यूटर सिस्टम द्वारा विश्लेषण किया जाता है।
  • बारकोड के विपरीत, RFID को वस्तुओं की पहचान करने के लिए ‘सीधी दृष्टि’ की आवश्यकता नहीं होती है।

स्रोत –द हिन्दू

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