APEDA ने जैविक उत्पाद प्रमाणन प्रक्रिया में कई दोषों को रेखांकित किया

APEDA ने जैविक उत्पाद प्रमाणन प्रक्रिया में कई दोषों को रेखांकित किया

हाल ही में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) ने जैविक उत्पाद प्रमाणन प्रक्रिया में कई दोषों को रेखांकित किया है ।

  • APEDA ने जैविक (ऑर्गेनिक) उत्पादों को प्रमाणित करने वाली एक फर्म की मान्यता को निलंबित कर दिया है। APEDA ने यह कार्रवाई, प्रमाणन प्रक्रिया में राष्ट्रीय विनियमों का उल्लंघन किए जाने के कारण की है।
  • फर्म को किसानों को बिना सूचित किए उत्पाद को प्रमाणित किये जाने और यूरिया के उपयोग जैसे उल्लंघनों का दोषी पाया गया है। साथ ही, बांग्लादेश जैसे आयातक देशों ने भी कुछ शिकायतें की हैं।
  • जैविक प्रमाणीकरण एक प्रक्रिया आधारित प्रमाणन है। यह जैविक खाद्य एवं अन्य जैविक कृषि उत्पादों पर केंद्रित है। इसमें आम तौर पर उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और शिपिंग के लिए उत्पादन मानकों का एक सेट होता है।

इन मानकों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • सिंथेटिक केमिकल इनपुट्स और आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) जीवों का उपयोग नहीं किया जा सकता।
  • कई वर्षों से रसायनों के उपयोग से मुक्त कृषि भूमि पर ही उत्पादन किया जाता है।
  • जैविक उत्पादों को अन्य गैर-प्रमाणित उत्पादों से अलग रखना अनिवार्य किया गया है।
  • इसमें समय-समय पर उत्पादन स्थल का निरीक्षण किया जाता है।

भारत में जैविक उत्पाद प्रमाणीकरण की दो योजनाएं संचालित की गई हैं:

  • निर्यात के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) – इसके तहत कोई तीसरा पक्ष प्रमाणन करता है। इसमें एक मान्यता प्राप्त जैविक प्रमाणन एजेंसी कृषि उत्पादों या प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों को प्रमाणित करती है। यह प्रमाणन राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया जाता है। प्रमाणन में APEDA द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
  • सहभागिता गारंटी योजना- इसमें उत्पादक एक-दूसरे की उत्पादन पद्धतियों का सत्यापन करते हैं। इस योजना को कृषि मंत्रालय के राष्ट्रीय जैविक कृषि केंद्र से सहायता प्राप्त होती है।

स्रोत द हिन्दू

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