अनिवासी भारतीयों (NRIs) को रिमोट वोटिंग सुविधा

अनिवासी भारतीयों (NRIs) को रिमोट वोटिंग सुविधा

हाल ही में केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया है कि वह अनिवासी भारतीयों (NRIs) को रिमोट वोटिंग सुविधा देने पर विचार कर रही है।

  • रिमोट वोटिंग के तहत मतदाताओं को उनके पंजीकृत निर्वाचन क्षेत्र के निर्धारित मतदान केंद्रों की बजाय अन्य स्थानों से मतदान करने की अनुमति होती है। ये स्थान देश के भीतर या विदेश में भी हो सकते हैं।
  • NRIs को वर्ष 2011 में मतदान का अधिकार दिया गया था। यह अधिकार लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA) 1950 में संशोधन के द्वारा प्रदान किया गया था।
  • हालांकि, अधिनियम की धारा 20A के अनुसार विदेशों में रह रहे भारतीय मतदाताओं को अपना वोट डालने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्रों में शारीरिक रूप से उपस्थित होना अनिवार्य है।

रिमोट वोटिंग का महत्व

  • भौगोलिक बाधाओं के कारण लाखों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर पाते हैं। रिमोट वोटिंग का उद्देश्य इन समस्याओं को दूर करना है।
  • मतदाता केवल एक पंजीकृत मतदान केंद्र से ही नहीं, बल्कि कई अन्य जगहों से भी वोट डाल सकता है।
  • यह संविधान के अनुच्छेद 326 की भावना के भी अनुरूप है। यह अनुच्छेद वयस्क मताधिकार के आधार पर मतदान का अधिकार प्रदान करता है।
  • रिमोट वोटिंग प्रतिनिधि लोकतंत्र को भी मजबूत करती है।

रिमोट वोटिंग से जुड़ी चिंताएं

  • मतपत्र की गोपनीयता का उल्लंघन होता है, क्योंकि इसे हैक किया जा सकता है। इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।
  • मतदाता की पहचान करना मुश्किल है। यह मतदान प्रतिशत की गुणवत्ता और बेहतर प्रतिनिधित्व को बाधित करती है।

मतदान की अन्य प्रणालियां

  • प्रॉक्सी वोटिंग : इसे वर्ष 2003 में शुरू किया गया था। इसके तहत एक पंजीकृत मतदाता अपना मताधिकार अपने किसी प्रतिनिधि को सौंप सकता है।
  • केवल “वर्गीकृत सेवा मतदाता को ही इसकी अनुमति है। इनमें सशस्त्र बल, सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF, जनरल इंजीनियरिंग रिज़र्व फोर्स और सीमा सड़क संगठन के सदस्य शामिल हैं।

इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रेषित पोस्टल बैलट सिस्टम:

  • इसमें मतदान-पत्र को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सेवा मतदाताओं को प्रेषित किया जाता है।
  • इनमें सशस्त्र बलों के सदस्य, पुलिस (राज्य के बाहर सेवारत), भारत के बाहर नियुक्त सरकारी कर्मचारी और उनके/उनकी पति/पत्नी; निवारक निरोध के तहत रखे गए लोग; विशेष मतदाता जैसे भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति आदि शामिल हैं।

स्रोत – द हिन्दू

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