MSMEs पर कोविड-19 के प्रभाव पर संसदीय समिति की रिपोर्ट
MSMEs पर कोविड-19 के प्रभाव पर संसदीय समिति की रिपोर्ट
हाल ही में, समिति ने लघु व्यवसायों की सहायता के लिए नए आर्थिक-पैकेज की आवश्यकता प्रकट की है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) पर कोविड-19 के प्रभाव का अध्ययन करने वाली संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा घोषित ‘प्रोत्साहन पैकेज’ अपर्याप्त है।
इस दौरान किए गए उपाय, तत्काल राहत के रूप में मांग उत्पन्न करने के लिए नकदी प्रवाह में सुधार की बजाय केवल ऋण लेने के विकल्प मात्र हैं। साथ ही ये उपाय दीर्घकालिक परिणामों पर आधारित प्रतीत हो रहे हैं, जबकि इस संकट काल में शीघ्र परिणाम देने वाले उपायों की आवश्यकता है।
मुख्य निष्कर्षः
MSMEs द्वारा सामना किए जाने वाले मुद्दों में ऋण सुविधाओं और कार्यशील पूंजी की अनुपलब्धता, उच्च अनौपचारिकता, निम्न वित्तीय लचीलापन, कच्चे माल की उपलब्धता आदि शामिल हैं। इसके अतिरिक्त आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, भुगतान में विलंब और महामारी के दौरान वैश्विक मंदी ने उन परप्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न किया है।
मुख्य अनुशंसाएं:
- मांग, निवेश, निर्यात को बढ़ावा देने और रोजगार सृजन के उद्देश्य हेतु एक व्यापक आर्थिक पैकेज प्रदान कियाजाना चाहिए।
- MSMEs क्षेत्र को हुई वास्तविक क्षति का आकलन करने के लिए विस्तृत अध्ययन किए जाने की आवश्यकता है।
- राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक रोजगार कार्यालय की स्थापना की व्यवहार्यता का विश्लेषण करके एक नई राष्ट्रीय रोजगार नीति पर विचार किया जा सकता है।
- लंबित भुगतान के विरुद्ध कठोर प्रावधान किए जाने की आवश्यकता है।
- एक नए उद्यम पंजीकरण पोर्टल के शुभारंभ के संबंध में जागरूकता सृजित करने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए।
भारत में MSMEs का महत्वः
ये देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 प्रतिशत तथा कुल निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत का योगदान करते हैं। साथ ही, ये देश भर में लगभग 110 मिलियन लोगोंको रोजगार भी प्रदान करते हैं।भारत में लगभग 6.3 करोड़ MSMEs हैं।
स्रोत –पीआईबी
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