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पारे पर मिनामाता अभिसमय (Minamata Convention on Mercury)

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पारे पर मिनामाता अभिसमय (Minamata Convention on Mercury)

हाल ही में पारे पर मिनामाता अभिसमय (Minamata Convention on Mercury) के पक्षकारों का चौथा सम्मेलन (COPA) इंडोनेशिया के बाली में आयोजित हो रहा है ।

Minamata Convention on Mercury

  • पारे पर मिनामाता अभिसमय का जेनेवा में वर्ष 2013 में अपनाया गया था। यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को पारे के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए विश्व की पहली कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि है।
  • इस अभिसमय का नाम उस जापानी शहर (मिनामाता) के नाम पर रखा गया है, जो 1950 के दशक में मिनामाता रोग का केंद्र बन गया था। मिनामाता रोग पारे की गंभीर विषाक्तता के कारण होने वाली एक तंत्रिका संबंधी बीमारी है।
  • भारत ने वर्ष 2014 में इस अभिसमय पर हस्ताक्षर किए थे, और वर्ष 2018 में इसकी अभिपुष्टि (rectify) की थी।
  • यह अभिसमय वर्ष 2017 में लागू हुआ था। बाली में आयोजित सम्मेलन में, इंडोनेशिया के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र ने भी एक वैश्विक घोषणा-पत्र प्रस्तुत किया है। इसमें मिनामाता अभिसमय के पक्षकारों से वैश्विक स्तर पर हो रहे पारे के गैर-कानूनी व्यापार से निपटने का आह्वान किया गया है। हालांकि, यह घोषण-पत्र गैर-बाध्यकारी है।

इसमें पक्षकारों से आह्वान किया गया है वेः

  • पारे के व्यापार की निगरानी और प्रबंधन के लिए व्यावहारिक उपकरण का विकास करें; अधिसूचना जारी करें; तथा सूचनाओं को साझा करने की एक प्रणाली भी विकसित करें।
  • पारे के गैर-कानूनी व्यापार से निपटने से संबंधित अनुभवों और तरीकों का आपस में आदान-प्रदान करें। दस्तकारी और छोटे पैमाने पर सोने के खनन में पारे के उपयोग को कम करें।

 कुछ अन्य अभिसमय या कन्वेंशनः

  • रॉटरडैम कन्वेंशनः यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कुछ प्रकार के खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के उपयोग से संबंधित है।
  • बेसल कन्वेंशनः यह खतरनाक अपशिष्टों की सीमा-पार आवाजाही और उनके निपटान के नियंत्रण से संबंधित है।
  • वियना कन्वेंशनः यह ओजोन परत के संरक्षण से संबंधित है।
  • स्टॉकहोम कन्वेंशनः यह स्थायी कार्बनिक प्रदूषकों (Persistent Organic Pollutants: POPS) से संबंधित है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पारे को उन शीर्ष दस रसायनों या रसायनों के समूहों में शामिल किया है, जो लोक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चिंता का कारण हैं।  यह तंत्रिका तंत्र, पाचन और प्रतिरक्षा प्रणाली, फेफड़े, गुर्दे, त्वचा एवं आंखों पर विषाक्त प्रभाव डाल सकता है।

विश्व में संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत पारे का सबसे अधिक उपयोग करने वाला दूसरा देश है।

स्रोत -द हिन्दू

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