भारतीय रेल की “कवच” तकनीक के अनुप्रयोग

भारतीय रेल की कवचतकनीक के अनुप्रयोग

रेल मंत्री ने सूचित किया कि “कवच” तकनीक अब देशव्यापी कार्यान्वयन के लिए तैयार है और प्रतिवर्ष 4,000-5,000 कि.मी. रेलवे मार्ग को स्वदेशी तकनीक “कवच” के तहत लाया जाएगा।

  • रेल मंत्री द्वारा गुल्लागुड़ा-चिटगिड्डा रेलवे स्टेशनों के बीच “कवच” की कार्य प्रणाली के ट्रायल का निरीक्षण किया गया।
  • कवच स्वदेश में विकसित ‘ट्रेन टक्कर रोधी प्रणाली (Train collision Avoidance System: TCAS) है।
  • यह इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (FD) उपकरणों का एक सेट होता है। इसे लोकोमोटिव (रल इंजन), सिग्नलिंग सिस्टम और पटरियों पर लगाया जाता है।
  • ये उपकरण, रेलगाड़ियों के ब्रेक को नियंत्रित और ड्राइवरों को सचेत करने के लिए अल्ट्रा-हाई रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग करके एक-दूसरे से संपर्क स्थापित करते हैं।

कवचकी प्रमुख विशेषताएं:

  • जब मानवीय गलती के कारण कोई ट्रेन किसी रेड सिग्नल को पार कर आगे बढ़ जाती है, तो यह प्रणाली स्वचालित रूप से सक्रिय होकर ट्रेन में ब्रेक लगा देती है। इस प्रकार यह प्रणाली ट्रेनों के अचानक आमने-सामने आ जाने पर होने वाली टक्कर से भी बचाती है।
  • इस प्रणाली के तहत आगे आने वाली लेवल क्रॉसिंग से पहले, हूटर अपने आप बज जाता है। इससे कोहरे की दशा में दूर तक स्पष्ट दिखाई न देने की स्थिति में लोको-पायलटों (यानी ट्रेन ड्राईवर) को सहायता मिलती है।
  • जहाँ रेलवे लाइन सड़क को पार करती है, उसे लेवल क्रॉसिंग कहते हैं।
  • किसी घुमावदार मोड़ पर या पुलों को पार करते समय ट्रेन की गति स्वचालित रूप से कम होकर, निर्धारित सीमा पर पहुँच जाती है।
  • इसका वर्ष 2012 से विकास किया जा रहा है। इसे भारतीय उद्योग के सहयोग से अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (Research Design and Standards Organisation: RDSO) द्वारा विकसित किया गया है। इसका परीक्षण दक्षिण मध्य रेलवे में किया गया है।

रेलवे में सुरक्षा के लिए की गई अन्य पहलें:

  • मानवरहित लेवल क्रॉसिंग को समाप्त करना,
  • रोलिंग स्टॉक (सभी प्रकार की रेल गाड़ियों) की ऑनलाइन निगरानी करना,
  • रेल यात्रियों की सुरक्षा के लिए लिंक हॉफमैन बुश कोच प्रणाली को अपनाना, आदि।

स्रोत द हिन्दू

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