100वें अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस संपन्न

100वें अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस संपन्न

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस जुलाई के पहले शनिवार को मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1923 में अंतर्राष्ट्रीय सहकारी आंदोलन और अंतर्राष्ट्रीय सहकारी गठबंधन ने शुरू किया था।

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस 2022 की थीम है “सहकारिता एक बेहतर विश्व का निर्माण करती है”।

सहकारिताएं जन-केंद्रित उद्यम हैं। इनका स्वामित्व, नियंत्रण और संचालन इनके सदस्यों के हाथों में होता है। ये उद्यम सदस्यों की साझी आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करते हैं।

ये स्वैच्छिक संगठन होते हैं, ये स्थानीय रूप से स्वायत्त होते हैं, ये स्व-सहायता के सिद्धांत पर कार्य करते हैं आदि।

सहकारी संस्थाओं के निम्नलिखित लाभ हैं:

  • ये सुरक्षित और उत्पादक रोजगार प्रदान करती हैं,
  • इनके सामाजिक और आर्थिक दोनों उद्देश्य होते हैं,
  • ये मूल्य और समुदाय आधारित हैं,
  • ये सस्ते ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराती हैं,
  • ये सामाजिक पूंजी के उत्पादन और उपयोग में सहायता प्रदान करती हैं आदि।

प्रमुख चुनौतियां निम्नलिखित हैं:

  • सभी भौगोलिक क्षेत्रों में समान पहुंच नहीं है,
  • इनकी अभिशासन व्यवस्था में खामियां मौजूद हैं,
  • लागत में प्रतिस्पर्धा की कमी है आदि।

भारत में सहकारिता

  • विश्व में सर्वाधिक सहकारी आंदोलन भारत में हैं। विश्व भर में 30 लाख वैश्विक सहकारी समितियां हैं। इनमें से भारत में 55 लाख सहकारी समितियां (अमूल, इफको आदि) हैं। 191% सहकारी समितियां गांवों में मौजद हैं। इनसे लगभग 13 करोड लोग सीधे तौर पर जडे हए हैं।
  • सहकारी समिति, सहकारी समिति अधिनियम, 1912 के प्रावधानों के तहत गठित की जा सकती है।
  • सहकारी समितियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए 97वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संविधान में अनुच्छेद- 43B और भाग- IXB जोड़े गए थे।

सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए आरंभ की गई पहलें

  • वर्ष 2021 में सहकारिता मंत्रालय गठित किया गया था।
  • केंद्र सरकार ने प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को उनके मुख्य व्यवसाय में विविधता लाने में सक्षम बनाने के लिए आदर्श उपनियम तैयार किए हैं।
  • सहकारी विकास कार्यक्रमों की योजना बनाने, प्रोत्साहन देने, समन्वय करने और वित्तपोषण के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की स्थापना की गयी है।
  • गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) प्लेटफॉर्म पर सहकारी समितियों को ‘खरीदार’ के रूप में पंजीकरण कराने की अनुमति दी गयी है।

स्रोत द हिन्दू

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