इंटर ऑपरेटेबल रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (IoRS) के लिए मानक संचालन प्रक्रिया

इंटरऑपरेटेबल रेगुलेटरी सैंडबॉक्स(IoRS) के लिए मानक संचालन प्रक्रिया

­­­­­­हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने इंटर-ऑपरेटेबल रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (IoRS) के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) की घोषणा की है ।

  • यह रिपोर्ट भारतीय अंतरिक्ष संघ ISpA और अर्स्ट एंड यंग के सहयोग से तैयार की गई है।
  • यह भारत में एक समग्र अंतरिक्ष इकोसिस्टम विकसित करने पर बल देती है।
  • इसमें भारत में अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के परिदृश्य के बारे में बताया गया है।
  • इसके अलावा, देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में तेजी लाने की इसकी क्षमता का भी आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के वर्ष 2025 तक 13 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
  • वर्ष 2014 से वर्ष 2019 के दौरान, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो/ISRO) ने 26 देशों के उपग्रहों के प्रक्षेपण से 5 मिलियन डॉलर से अधिक का राजस्व अर्जित किया था।
  • भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का केवल 2% है। हालांकि, निजी क्षेत्र की भागीदारी से यह 8% तक पहुंच सकता है।

अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की भागीदारी का महत्व

  • अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों और सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सकता है।
  • इसरो रणनीतिक उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
  • निजी क्षेत्र अंतरिक्ष आधारित किफायती अनुप्रयोगों और सेवाओं के विकास के लिए नवाचार का समावेश करेगा।

अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की भागीदारी से जुड़ी चिंताएं:

  • अनुमोदनों की संख्या अधिक है और प्रक्रिया भी अस्पष्ट है।
  • स्पष्ट, विशेष और पूर्वानुमान योग्य विनियमों का अभाव है।
  • हित संघर्ष की स्थिति मौजूद है क्योंकि इसरो विनियामक और ऑपरेटर दोनों तरह की भूमिकाएं निभाता है।

अंतरिक्ष में निजी क्षेत्र की भागीदारी के लिए उठाए गए कदम

  • भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (INSPACe) की स्थापना की गई है।
  • न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के कार्यों को ‘आपूर्ति संचालित मॉडल’ से ‘मांग-संचालित मॉडल’ में बदल दिया गया है।
  • अंतरिक्ष क्षेत्र में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए नई भारतीय अंतरिक्ष नीति तैयार की जा रही है।

ISpA के बारे में:

  • वर्ष 2021 में भारतीय में प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम सेभारतीय अंतरिक्ष संघ (ISpA) का शुभारंभ किया।­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­­ ISpA अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित मामलों पर एकल खिड़की और स्वतंत्र एजेंसी के रूप में कार्य करेगा।
  • ISpA को भारतीय अंतरिक्ष उद्योग को एकीकृत करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है। ISpA का प्रतिनिधित्व प्रमुख घरेलू और वैश्विक निगमों द्वारा किया जाएगा जिनके पास अंतरिक्ष तथा उपग्रह प्रौद्योगिकियों में उन्नत क्षमताएँ हैं।

स्रोत – द हिन्दू

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