लद्दाख के हनले में भारत की पहली नाइट स्काई सैंक्चुरी

लद्दाख के हनले में भारत की पहली नाइट स्काई सैंक्चुरी

हाल ही में लद्दाख के हनले में भारत की पहली नाइट स्काई सैंक्चुरी बनाने का कार्य एक महीने में पूरा हो जाएगा।

हनले नाइट स्काई सैंक्चुरी, भारत का पहला डार्क स्काई रिज़र्व है। इसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) स्थापित कर रहा है।

यह चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य (CWS) का हिस्सा होगा ।

नाइट स्काई सैंक्चुरी का महत्व

यह ऑप्टिकल, इन्फ्रा – रेड और गामा-रे दूरबीनों की स्थापना के लिए दुनिया के सबसे ऊंचे स्थानों में से एक होगा।

यह क्षेत्र में खगोलीय – पर्यटन को प्रोत्साहित करेगा। इस तरह यह विज्ञान के माध्यम से स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा ।

यह अवांछित प्रकाश प्रदूषण और रोशनी से रात्रिकालीन आकाश को संरक्षित करेगा । अवांछित प्रकाश प्रदूषण एवं रोशनी वैज्ञानिक पर्यवेक्षणों और आकाश की प्राकृतिक स्थितियों के लिए गंभीर खतरा हैं।

डार्क स्काई रिज़र्व के बारे में

डार्क स्काई रिज़र्व एक ऐसा स्थान होता है, जहां नीतियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि उस भूखंड या क्षेत्र में कृत्रिम प्रकाश कम से कम पहुंच सके ।

इंटरनेशनल डार्क स्काई एसोसिएशन (IDA) अलग-अलग मानदंडों के आधार पर स्थानों को अंतर्राष्ट्रीय डार्क स्काई प्लेस, पार्क, सैंक्चुअरी और रिज़र्व के रूप में नामित करता है।

IDA संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है।

हनले लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित है। यहां मानवीय गतिविधियां न के बराबर हैं। बादल रहित आकाश और निम्न वायुमंडलीय जलवाष्प इसे खगोलीय पर्यवेक्षणों के लिए विश्व के सर्वश्रेष्ठ स्थलों में से एक बनाते हैं।

चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य लद्दाखी चांगथांग पठार में स्थित है। यहां विश्व की सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित झील त्सो मोरीरी अवस्थित है।

यहां पाई जाने वाली पशु प्रजातियां हैं: हिम तेंदुआ, तिब्बती भेड़िया, जंगली याक, भरल, भूरा भालू आदि ।

प्रकाश प्रदूषण पक्षियों एवं लोगों पर कैसे प्रभाव डालता है ?

प्रकाश प्रदूषण रात और दिन, दोनों समय सक्रिय रहने वाले पक्षियों की कई प्रजातियों को प्रभावित करता है ।

प्रकाश के कारण दिशा भ्रम : ‘प्रकाश प्रदूषण रात में उड़ने वाले पक्षियों को आकर्षित करता है और उन्हें विचलित करता है। इससे वे प्रकाश वाले क्षेत्रों में ही चक्कर लगाते रहते हैं। इससे उनकी संग्रहित ऊर्जा कम हो जाती है और फिर उनके लिए थकावट, शिकार तथा घातक टक्कर जैसे खतरे पैदा हो जाते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र में बाधक : प्रकाश प्रदूषण न केवल पक्षियों, बल्कि अन्य जानवरों और पौधों को भी प्रभावित करता है ।

प्रकाश के कारण टकराव : प्रकाश प्रदूषण के कारण इमारतों और अन्य निर्मित संरचनाओं से टकराकर लाखों पक्षियों की मौत हो जाती है ।

जैविक चक्र में बाधा : प्रकाश प्रदूषण पक्षियों के व्यवहार में परिवर्तन कर सकता है। इससे उनका प्रवास, भोजन की खोज, ध्वन्यात्मक (vocal) संचार आदि प्रभावित होता है। साथ ही, उनका दैनिक व वार्षिक जैविक चक्र भी बाधित होता है ।

मानव स्वास्थ्य को नुकसान : दुनिया की 80% से अधिक आबादी ‘प्रकाश प्रदूषित आकाश के नीचे रहती है । प्रकाश प्रदूषण मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। यह नींद संबंधी विकार, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाता है ।

स्रोत – द हिन्दू

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