सामान्य अध्ययन प्रश्न प्रत्र – 4 (चौथे) की रणनीति (GS Paper - 4 Strategy) in Hindi

एथिक्स (नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठाऔर अभिरुचि) सामान्य अध्ययन चौथे की रणनीति

वर्ष 2013 में सिविल सेवा मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम में सामान्य अध्ययन के चौथे प्रश्नपत्र के रूप में ‘नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि’ को शामिल किया गया, जिसे सामान्य भाषा में ‘एथिक्स’ (Ethics) के नाम से जाना जाता है। यह प्रश्नपत्र अन्य प्रश्नपत्रोंकी तरह 250 अंको का होता है जिसमें नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंध, अभिव्यक्ति, सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य, भावनात्मक समझ, लोक प्रशासन में सिविल सेवक के मूल्य तथा भारत एवं विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिको के योगदान आदि खण्डों से थियोरी तथा केस स्टडी के प्रश्न पूछे जाते हैं।

इस प्रश्नपत्र का मुख्य उद्देश्य सिविल सेवक के अंदर ईमानदारी, नैतिकता, सत्यनिष्ठा और संवेदना जैसे गुणों की जाँच करना हैं।

क्योंकि यदि हम पिछले आठ वर्षों के एथिक्स के प्रश्नपत्र को उठाकर देखें, तो पाएंगे कि इस प्रश्नपत्र में ऐसा कुछ भी नहीं पूछा जाता है जिसके लिये उम्मीदवार को बहुत अधिक किताबी ज्ञान की जरूरत होती हैं।इसके लिये परीक्षार्थी को सामान्य समझ की जरुरतहोती हैं। सामान्य अध्ययन चौथे की रणनीति | परन्तु कई बार ऐसा देखा गया हैं कि इसमें कुछ परीक्षार्थी को बहुत अधिक अंक प्राप्त हो जाते हैं तो किसी को बहुत कम अंक प्राप्त होता है। इसका मुख्य कारण प्रश्नपत्र की अपनी मूल प्रवृत्ति है, क्योंकि सामान्य प्रश्नों का उत्तर देने के लिये रचनात्मकता और मौलिकता आवश्यक होती है।

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पाठ्यक्रम सामान्य अध्ययन प्रश्न प्रत्र 4 (चौथे)

सामान्यतौर पर एथिक्स का प्रश्नपत्र दो खंडों में विभाजित होता हैं। खंड ‘क’ में ‘नैतिकता’, ‘सत्यनिष्ठा’, ‘ईमानदारी’, ‘लोक प्रशासन में पारदर्शिता’ ‘सिविल सेवकों की जवाबदेही’, ‘महापुरुषों के नैतिक विचार व उनके जीवन आदर्श’, ‘भावनात्मक समझ’, ‘शासन व्यवस्था में ईमानदारी’ जैसे मुद्दे शामिल होते हैं  जिसमें लगभग 13 से 15 प्रश्न होते हैं और इनको अधिकतम 150 शब्द में लिखना होता है। 

तथा दूसरा खंड केस स्टडीज़ का होता है जिसमें द्वंद्व से जुड़े सामाजिक मुद्दों के प्रश्न पूछे जाते हैं जिसमें आपको उनके युक्तिसंगत समाधान देने होतेहैं।इसमें उम्मीदवार को 250 शब्दों में उत्तर देना होता हैं।क्योंकि एक सिविल सेवक के रूप में आपको हर कदम पर इस प्रकार के द्वंद्वों और चुनौतियों का सामना करना होता है और जहाँ एक तरफ आपका कोई बहुत नज़दीकी होता हैं तो दूसरी तरफ कोई बहुत ज़रूरतमंद आम जन होता हैं, और आपको किसी एक के हित में निर्णय लेना होता है। इस दशा में आपका कर्त्तव्य एक सार्थक निर्णय लेने से होता है जिसके द्वारा संवैधानिक, आर्थिक, सामाजिक और नैतिक आदर्शो को प्राप्त किया जा सके। अतः इन्ही प्रश्नों के माध्यम से UPSC आपके निर्णय का मूल्यांकन करती है। इन प्रश्नों में कई बार आपको समस्या समाधान के विकल्प भी दिये गए होते हैं, तो कई बार केवल समस्या दी जाती है, उसका विकल्प नहीं दिया गया होता हैं।

अतः संघ लोक सेवा आयोग के अनुसार इस प्रश्नपत्र का पाठ्यक्रम इस प्रकार है: सामान्य अध्ययन चौथे की रणनीति

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र – 4
नीतिशास्त्रसत्यनिष्ठा और अभिरुचि

इस प्रश्नपत्र में ऐसे प्रश्न शामिल होंगे जो सार्वजनिक जीवन में उम्मीदवारों की सत्यनिष्ठा, ईमानदारी से संबंधित विषयों के प्रति उनकी अभिवृत्ति तथा उनके दृष्टिकोण तथा समाज से आचार-व्यवहार में विभिन्न मुद्दों तथा सामने आने वाली समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी मनोवृत्ति का परीक्षण करेंगे। इन आयामों का निर्धारण करने के लिये प्रश्न-पत्र में किसी मामले के अध्ययन (केस स्टडी) का माध्यम भी चुना जा सकता है। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों को कवर किया जाएगा।

Topic 1 – नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

Topic 2 – अभिवृत्तिः सारांश (कंटेन्ट), संरचना, वृत्ति; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिरुचि; सामाजिक प्रभाव और धारणा।

Topic 3 – सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य- सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना।

Topic 4 – भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।

Topic 5 – भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।

Topic 6 – लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन, शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन व्यवस्था।

Topic 7 – शासन व्यवस्था में ईमानदारीः लोक सेवा की अवधारणा; शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार, सरकार में सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, नीतिपरक आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।

Topic 8 –उपर्युक्त विषयों पर मामला संबंधी अध्ययन (केस स्टडीज़)।

पाठ्य सामग्री

  • ‘एथिक्स’ के प्रश्नपत्र की तैयारी के लिए कोई ऐसी अकेली पुस्तक नहीं है जिसे पढ़कर अभ्यर्थी इस विषय में महारतहासिल कर ले। ‘एथिक्स’ का पाठ्यक्रम बहुत व्यापक है और अभ्यर्थी से इस बात की अपेक्षा की जाती है कि वह दैनिक जीवन की सामान्य घटनाओं पर नज़र बनाए रखें तथा एक सिविल सेवक के रूप में उनके समाधान ढूँढ़ने काप्रयास करे।
  • ‘एथिक्स’ के प्रश्नपत्र की तैयारी के लिए विश्व व भारत के प्रसिद्ध नैतिक विचारकों और दार्शनिक चिंतकों के विचारों का गहन अध्ययन करें। इस प्रश्नपत्र केअधिकतर प्रश्नअभ्यर्थी की सामान्य समझ पर ही आधारित होते हैं। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों व यूथ डेस्टिनेशन के मॉडल प्रश्नपत्रों का नियत समय में अधिक से अधिक अभ्यास करें।
  • केस स्टडीज़ में ऐसे समाधानों को बताने का प्रयास ना करें जो एक सिविल सेवक के ईमानदार आचरण के विरुद्ध हों अथवाकिसी भी रूप में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हों अथवासंविधान व कानून का विरोध करते हों अथवानिजी स्वार्थों को आम जन के हितों से ऊपर रखते हों।
  • अभ्यर्थी को अपना ‘एटीट्यूड’ (Attitude) व ‘एप्टीट्यूड’ (Aptitude) दोनों नैतिक, संवेदनायुक्त और भ्रष्टाचार विरोधी रखने हैं तथाउत्तरों में भी इसी तरह के विचार प्रस्तुत करने हैं।

पठनीय पुस्तक

  • एनसीईआरटी – मनोविज्ञान (क्लास-11तथा12)
  • इग्नू – मनोविज्ञान (स्नातक स्तर)
  • नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि:जी. सुब्बाराव एवं पी एन रॉय चौधरी
  • एआरसी(ARC)4 रिपोर्ट: शासन में नैतिकता
  • यूथ डेस्टिनेशन क्लास नोट्स
  • पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र

एथिक्स की तैयारी कैसे करे?

संघ लोक सेवा आयोगके अनुसार एथिक्स में दिए गए कुल 8 टॉपिक्स को केवल इस उद्देश्य से विभाजित किया गया है कि सभी प्रासंगिक समस्याओं की बुनियादी समझ को विकसित किया जा सके और विश्लेषण क्षमता को और अधिक बढ़ाया जा सके जिससे एक सिविल सेवक के रूप में  सामाजिक-आर्थिक लक्ष्यों और वंचित वर्गों के पक्ष / विपक्ष का परीक्षण करने की समझ अभ्यर्थी के पास है या नहीं इसका आकलन किया जा सके।

सामान्य अध्ययन प्रश्न प्रत्र 4 – नैतिक मूल्यों और अवधारणाओं का एक सरल अनुप्रयोगएथिक्स कहलाता है जिसको प्राप्त करने के लिये नैतिक मूल्यों में स्थिरता को बनाये रखना अतिआवश्यक होता है। एक अभ्यर्थी के रूप में हमें समाज, मित्रों, रिश्तेदारों, शत्रुओं आदि जैसी लगभग सभी चीजों के बारे में विचार बनाने की आवश्यकता है और इसके लिये एथिक्स के पाठ्यक्रम को सही से समझने और उसको अपने जीवन में लागू करने की परम आवश्यकता होती हैं।

आवश्यक निर्देश 

  • अत्यधिक अध्ययन की अपेक्षा उच्च नैतिक मूल्यों को अपने जीवन में शामिल करने की कोशिश करें, जिससे मौलिक उत्तर लेखन में सहायता मिलेगी।
  • अपनी विचारधारा को वर्तमान समय की आवश्यकता और सिविल सेवा के अनुरूप परिवर्तित करने काप्रयास करें।
  • किसी भी परिस्थिति को बहुत जटिल न देखकर मध्यम मार्ग अपनाने की जरुरत है।
  • इस प्रश्नपत्र के लिये आप पहले से तैयार किये उत्तर का प्रयोग कम करे, क्योंकि पहले से तैयार प्रश्नपत्र में कोई विशेष भूमिका नही निभा पाते हैं।
  • विषय के पाठ्यक्रम को बहुत अधिक रटने की आवश्यकता नहीं हैं,क्योंकिप्रश्नपत्रनैतिक मूल्यों और अवधारणाओं का आपके वास्तविक जीवन में उनके अनुप्रयोग पर आधारित होता है।
  • सबसे महत्वपूर्ण बात किसी अभ्यर्थीके लिये यह हैं कि कई जटिल सिद्धांतों, विचारों, परिभाषाओ और दार्शनिक ग्रंथो कीदार्शनिक बातो को अपनाने की आवश्यकता नहीं है। यह आपके तैयारी में आपके ध्यान को भ्रमित कर सकते हैं।
  • अपने नोट्स में अच्छे शब्दों,कोट्स (Quotes),उदाहरणोंऔर लघु कथाओ (Short stories) आदि का संग्रह करें।
  • उत्तर लेखन में आपको बहुत दार्शनिक नजरिये की जरुरत नहीं होती, इसमें आपको दार्शनिकता के बजाय एक तार्किकता पर जोर देने की जरुरत हैं।
  • उत्तर लेखन में किसी भी उत्तर में नैतिकता को बहुत अधिक बल से न प्रस्तुत करे, क्योंकि यह कभी-कभी परीक्षकको बनावटी लग सकता है और इसका बुरा प्रभाव आपके अंको पर पड़ सकता है।
  • इस विषय में वैसे तो यह नहीं कहा जा सकता कि यह टॉपिक्स बहुत सीमित है, परन्तु यदि किसी बिंदु पर आपकीअवधारणा (concept) स्पष्टनहीं हैं तो उसको विभिन्न स्त्रोतों से तैयार करे और परीक्षा में इस प्रकार के पेंचीदा सवालों के जवाब देने के लिये स्मार्ट तरीको का उपयोग करे।
  • पिछले वर्षों के संघ लोक सेवा आयोगके प्रश्नपत्र का अध्ययन करें।
  • समय सीमा के अंदर उत्तर लेखन के लिये यूथ डेस्टिनेशन कीटेस्ट सीरीज़ को भी ज्वाइन कर सकते हैं।
  • प्रश्न के संदर्भ के अनुसार लिखना और यथासंभव व्यावहारिक रूप से अपना तर्क रखना और उत्तर देना अधिक महत्वपूर्ण है।

नीति शास्त्र का टॉपिक के अनुसार चर्चा और तैयारी के स्त्रोत

इसके तहत हम इन टॉपिक्स के अंदर आने वाले सब-टॉपिक्स को देखेंगे और उनकी तैयारी कैसे करे, उसको देखेंगे और इन टॉपिक्स से पिछले वर्ष पूछे गए प्रश्नों को भी देखेंगे 

Topic 1 – नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-संबंधः मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम; नीतिशास्त्र के आयाम; निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र, मानवीय मूल्य- महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा; मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

इसके सब टॉपिक्स इस प्रकार हैं:

  • नीतिशास्त्र
  • मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम
  • नीतिशास्त्र के आयाम
  • निजी जीवन में एथिक्स
  • इंटरनेशनल एथिक्स
  • बायो एथिक्स
  • साइबर एथिक्स
  • पर्यावरण एथिक्स
  • सार्वजनिक एथिक्स
  • मीडिया एथिक्स
  • निजी और सार्वजनिक संबंधों में नीतिशास्त्र
  • मानवीय मूल्य; महान नेताओं, सुधारकों और प्रशासकों के जीवन तथा उनके उपदेशों से शिक्षा
  • मानव मूल्य और समाजीकरण
  • व्यक्तिगत व्यक्तित्व और मूल्य
  • मान और कौशल
  • मौलिक और महत्वपूर्ण मूल्य
  • लोकतांत्रिक मूल्य
  • शासन और समाज में नैतिक मूल्य की भूमिका
  • सिविल सेवाओं में मूल्य का महत्व
  • संवेदनाहारी मूल्य
  • कार्य जीवन और पेशेवर नैतिकता में मूल्य
  • मूल्य विकसित करने में परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका।

इन टॉपिक्स को तैयार करने के स्त्रोत

  1. नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि:जी. सुब्बाराव एवं पी एन रॉय चौधरी
  2. इग्नू – मनोविज्ञान (स्नातक स्तर)
  3. यूथ डेस्टिनेशन क्लास नोट्स

Topic 2 – अभिवृत्तिः सारांश (कंटेन्ट), संरचना, वृत्ति; विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध; नैतिक और राजनीतिक अभिरुचि; सामाजिक प्रभाव और धारण।

इसके सब टॉपिक्स इस प्रकार हैं:

  • अभिवृत्तिः
  • अभिवृत्ति की संरचना और वृत्ति
  • अभिवृत्ति का विचार तथा आचरण के परिप्रेक्ष्य में इसका प्रभाव एवं संबंध
  • नैतिक और राजनीतिक अभिरुचि
  • सामाजिक प्रभाव और धारण।

इन टॉपिक्स को तैयार करने के स्त्रोत –

  1. इग्नू – मनोविज्ञान (स्नातक स्तर)
  2. नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि:जी. सुब्बाराव एवं पी एन रॉय चौधरी

Topic 3 – सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य- सत्यनिष्ठा, भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी, निष्पक्षता, सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव, कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति, सहिष्णुता तथा संवेदना।

इसके सब टॉपिक्स इस प्रकार हैं:

  • सिविल सेवा के लिये अभिरुचि तथा बुनियादी मूल्य
  • सत्यनिष्ठा
  • भेदभाव रहित तथा गैर-तरफदारी
  • निष्पक्षता
  • सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पण भाव
  • कमज़ोर वर्गों के प्रति सहानुभूति
  • सहिष्णुता तथा संवेदना

इन टॉपिक्स को तैयार करने के स्त्रोत

  1. नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि:जी. सुब्बाराव एवं पी एन रॉय चौधरी
  2. इग्नू – मनोविज्ञान (स्नातक स्तर)
  3. यूथ डेस्टिनेशन क्लास नोट्स

Topic 4 – भावनात्मक समझः अवधारणाएँ तथा प्रशासन और शासन व्यवस्था में उनके उपयोग और प्रयोग।

इसके सब टॉपिक्स इस प्रकार हैं:

  • भावनात्मक समझ की अवधारणा
  • प्रशासन और शासन व्यवस्था में भावनात्मक समझ का प्रयोग।

इस संदर्भ मेंनिम्नलिखित बिंदुओ को तैयार करने की आवश्यकता हैं:

भावनात्मक समझ से संबंधित सभी सिद्धांतो को

क्या भावनात्मक बुद्धि द्वारा विकसित किया जा सकता है?

भावनात्मक समझ के घटक

  • आत्म जागरूकता : भावनाओं को समझना और सटीक आत्म मूल्यांकन करना
  • स्व-प्रबंधन: आंतरिक सम्बन्ध, आवेगों का प्रबंधनऔर साधन का प्रबंधन
  • सामाजिक जागरूकता :लोगों और समूहों को सटीक जानकारी प्रदान करना
  • संबंध प्रबंधन : दूसरों में वांछनीय प्रतिक्रियाओं का संकेत प्राप्त करना
  • कार्यस्थल पर भावनात्मकसमझ का महत्व
  • सिविल सेवा में भावनात्मक समझका महत्व

 इन टॉपिक्स को तैयार करने के स्त्रोत

  1. नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा और अभिरुचि:जी. सुब्बाराव एवं पी एन रॉय चौधरीबुक 
  2. इग्नू – मनोविज्ञान (स्नातक स्तर)
  3. यूथ डेस्टिनेशन क्लास नोट्स

 Topic 5 – भारत तथा विश्व के नैतिक विचारकों तथा दार्शनिकों के योगदान।

इसके सब टॉपिक्स इस प्रकार हैं:

  • भारतीय दर्शन के इतिहास में नैतिकता
  • समकालीन भारतीय दर्शन में नैतिकता
  • पश्चिमी दर्शन के इतिहास में नैतिकता

प्रशासनिक विचारक

  • मैक्सवेबर
  • एल्टनमेयो
  • पीटरड्रकर
  • चेस्टरबरनार्ड
  • मैरीपार्करफोलेट

मध्यकालीन पश्चिमी दर्शनशास्त्र में नैतिकता

भारतीय विचारक

  • महात्मागांधी
  • डॉ. एस. राधाकृष्णन
  • रबींद्रनाथटैगोर
  • स्वामीदयानंदसरस्वती
  • महादेवगोविंदरानाडे
  • श्रीअरबिंदो
  • स्वामीविवेकानंद
  • सरदारपटेल
  • बुद्ध
  • भीमरावअंबेडकर
  • राजाराममोहनरॉय
  • छत्रपतिशाहूमहाराज
  • मदरटेरेसा
  • अमिताभचौधरी
  • अरुणारॉय
  • टी.एन.शेषन
  • ई. श्रीधरन

ग्रीक दर्शन में नैतिकता

विश्व विचारक

  • प्लेटो
  • अरस्तू
  • सुकरात
  • जेरेमीबेंटम
  • जेएसमिल
  • थॉमसहोब्स
  • जॉनलोके
  • जीनजैक्सरूसो
  • जॉनरॉल्स
  • इमैनुअलकांट
  • कैरोलगिलिगन
  • कैरलजॉनसार्टर
  • जॉर्ज विल्हेम फ्रेडरिक हेगेल
  • कन्फ्यूशियस
  • रेनडेडेकार्टेस
  • कार्लमार्क्स
  • एडमस्मिथ
  • थॉमसएक्विनास
  • डेविडह्यूम
  • डेमोक्रिटस
  • गैलीलियो
  • फ्रेडरिकनीत्शे
  • मोंटेस्क्यू
  • वोल्टेयर
  • थॉमसजेफरसन

Topic 6 – लोक प्रशासन में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रः स्थिति तथा समस्याएँ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ; नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि, नियम, विनियम तथा अंतरात्मा; उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन, शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण; अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे; कॉरपोरेट शासन व्यवस्था।

इसके सब टॉपिक्स इस प्रकार हैं:

  • लोक सेवा में नीतिशास्त्र की स्थिति तथा समस्याएँ
  • सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ तथा दुविधाएँ
  • नैतिक मार्गदर्शन के स्रोतों के रूप में विधि
  • नियम
  • विनियम तथा अंतरात्मा
  • उत्तरदायित्व तथा नैतिक शासन
  • शासन व्यवस्था में नीतिपरक तथा नैतिक मूल्यों का सुदृढ़ीकरण
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा निधि व्यवस्था (फंडिंग) में नैतिक मुद्दे
  • कॉरपोरेट शासन व्यवस्था

Topic 7 – शासन व्यवस्था में ईमानदारीः लोक सेवा की अवधारणा; शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार, सरकार में सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता, सूचना का अधिकार, नीतिपरक आचार संहिता, आचरण संहिता, नागरिक घोषणा पत्र, कार्य संस्कृति, सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता, लोक निधि का उपयोग, भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।

इसके सब टॉपिक्स इस प्रकार हैं:

  1. शासन व्यवस्था में ईमानदारी,
  2. लोक सेवा की अवधारणा,
  3. शासन व्यवस्था और ईमानदारी का दार्शनिक आधार,
  4. सरकार में सूचना का आदान-प्रदान और पारदर्शिता,
  5. सूचना का अधिकार,
  6. नीतिपरक आचार संहिता,
  7. आचरण संहिता,
  8. नागरिक घोषणा पत्र,
  9. कार्य संस्कृति,
  10. सेवा प्रदान करने की गुणवत्ता,
  11. लोक निधि का उपयोग,
  12. भ्रष्टाचार की चुनौतियाँ।

उपर्युक्त टॉपिक्स को तैयार करने के स्त्रोत:

  1. एआरसी(ARC) 4 रिपोर्ट: शासन में नैतिकता
  2. यूथ डेस्टिनेशन क्लास नोट्स

Topic 8 – उपर्युक्त विषयों पर मामला संबंधी अध्ययन (केस स्टडीज़)।

केस स्टडीज़ के लिये महत्वपूर्ण विषय निम्नलिखित हैं:

  • नैतिक दुविधा
  • संगठित अपराध
  • भ्रष्टाचार
  • आदिवासी
  • आरक्षण
  • एजुकेशन

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