IAEA के अनुसार पुनर्चक्रण वाले स्क्रैप में रेडियोधर्मी संदूषण का स्तर बढ़ रहा है

IAEA के अनुसार पुनर्चक्रण वाले स्क्रैप में रेडियोधर्मी संदूषण का स्तर बढ़ रहा है

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) द्वारा जारी नवीनतम “इंसिडेंट एंड ट्रैफिकिंग डेटाबेस” (ITDB) जारी किया गया है।

IAEA के इस अनुसार पुनर्चक्रण वाले स्क्रैप में रेडियोधर्मी संदूषण का स्तर बढ़ रहा है।

इस डेटाबेस ने निम्नलिखित तथ्यों को भी रेखांकित किया है:

  • रेडियोधर्मी युक्त अपशिष्ट उत्पादों (जिनमें पोत जैसे वाहन भी शामिल हैं) का जोखिम प्रबंधन पर ध्यान दिए बिना तेजी से पुनर्चक्रण किया जा रहा है ।
  • संदूषण का सबसे आम स्रोत फ़ीड सामग्री है, जिनसे उत्पाद का निर्माण किया जाता है। यह फ़ीड सामग्री अक्सर धातु पुनर्चक्रण उद्योग से प्राप्त होती है ।

ITDB की शुरुआत 1995 में IAEA सचिवालय ने की थी। इसे निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए निर्मित किया गया था-

  • परमाणु और अन्य रेडियोधर्मी सामग्रियों से जुड़ी अवैध तस्करी तथा अन्य सम्बंधित अनधिकृत गतिविधियों से निपटने में देशों की सहायता करना ।
  • रिपोर्ट की गई सूचनाओं का रखरखाव और उनका विश्लेषण करना, ताकि साझा खतरों, प्रवृत्तियों व पैटर्न की पहचान की जा सके ।
  • ITDB, अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की परमाणु सुरक्षा योजना का हिस्सा है।

इसके निम्नलिखित उद्देश्य हैं-

  • राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा व्यवस्थाओं की स्थापना, प्रबंधन और रखरखाव में देशों की सहायता करना ।
  • प्रभावी परमाणु सुरक्षा प्राप्त करने के वैश्विक प्रयासों में योगदान देना ।
  • परमाणु सुरक्षा पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सुगम बनाना और जागरूकता बढ़ाना।

रेडियोधर्मी उत्पादों से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत द्वारा आरंभ की गई पहलें

  • परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 बनाया गया है । यह परमाणु ऊर्जा और आयनीकारक विकिरण के उपयोग से संबंधित सभी गतिविधियों के लिए विनियामक ढांचा तैयार करता है ।
  • परमाणु ऊर्जा विनियामक बोर्ड की स्थापना की गई है। यह विनियामक कार्य करता है और सुरक्षा उपायों का कार्यान्वयन करता है।
  • परमाणु ऊर्जा (विकिरण सुरक्षा) नियम, 2004 निर्मित किए गए हैं।
  • परमाणु ऊर्जा (खाद्य और संबद्ध उत्पादों का विकिरण प्रसंस्करण) नियम, 2012 बनाए गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (International Atomic Energy Agency -IAEA)

  • इसे 1957 में संयुक्त राष्ट्र समूह के भीतर विश्व में “शांति के लिए परमाणु’ (Atoms for Peace) संगठन के रूप में स्थापित किया गया था।
  • यह परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विश्व भर में अपने सदस्य देशों तथा कई भागीदारों के साथ कार्य करता है ।
  • भारत सहित इसके 176 सदस्य हैं । और इसका मुख्यालय वियना (ऑस्ट्रिया) में स्थित है ।

स्रोत – डाउन टू अर्थ

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