हिंद महासागर में जीनोम मैपिंग

हिंद महासागर में जीनोम मैपिंग

  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद के घटक राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान ने हिंद महासागर में मौजूद जीवो के जीनोम मैपिंग करने की परीयोजना बनाई है ।
  • हिन्द महासागर मे यह अपनी तरह की पहली जीनोम मैपिंग परीयोजना होगी ।
  • इसके अंतर्गत एकल-कोशिका जीवों के अंदर मौजूद जीनोम और पोषक तत्व की प्रोटेक्टिव मैपिंग का संचालन करने के लिए एक 90 दिवसीय वैज्ञानिक क्रूज मिशन शुरू करने कि योजना है । ।
  • इस योजना के तहत मार्च के दूसरे सप्ताह से लेकर मध्य मई तक हिंद महासागर में एक समर्पित अभियान चलाया जायेगा|

मुख्य बिंदु

  • जीनोम मैपिंग के द्वारा कैंसर के उपचार तथा वाणिज्यिक जैव प्रोद्योगिकी क्रियाविधि में भारत के रिसर्च विंग को मजबूती मिलेगी |
  • इसके साथ जलवायु परिवर्तन और पोषक तत्वों की प्रोटेक्टिव मैपिंग के लिए सामुद्रिक प्रतिक्रिया के अध्ययन में सहायता प्राप्त होगी |
  • इस अभियान में 30 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं की टीम हिस्सा लेंगी , इसमे छह महिलाएं शामिल हैं |
  • इसमें लगभग 9000 समुद्री मील तक की दूरी तय की जाएगी | भारत के पूर्वी तट से हिंद महासागर में ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस में पोर्ट लुई से होते हुए पाकिस्तान की सीमा की तरफ से भारत के पश्चिमी तट तक के सूक्ष्मजीवों की जीनोम मैपिंग के लिए नमूने एकत्र किए जाएंगे |
  • शोधकर्ता समुद्र के विभिन्न हिस्सों से लगभग 5 किमी की औसत गहराई पर नमूने एकत्र करेंगे ।
  • जीनोम और सूक्ष्म पोषक तत्वों की खोज में पानी, तलछट, समुद्री पादप और विभिन्न जीवों के नमूने लिए जाएंगे इससे वाणिज्यिक जैव प्रोद्योगिकी अनुप्रयोगो में भारत के अनुसंधान को मजबूती मिलेगी ।
  • वैज्ञानिक समुद्र में पाए जाने वाले इन तत्वों में बैक्टीरिया, रोगाणुओं का मानचित्रण (मैपिंग) करेंगे।
  • मानचित्रण (मैपिंग) का मुख्य कारण पोषक तत्वों में आयरन , जिंक , मैग्नेशियम , कैडमियम , कोबाल्ट जैसे सूक्ष्म तत्वों कि उपस्थिति की जांच करना है |
  • हिन्द महासागर पृथ्वी का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है | इसमे पृथ्वी की सतह पर उपस्थित जल का लगभग 20% भाग समाहित है। हिन्द महासागर जलवायु तथा ऑक्सीज़न के विनयमन मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है |

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR)

  • वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research) भारत का सबसे बड़ा अनुसंधान एवं विकास संगठन है।
  • यह एक स्वायत्त संस्था है तथा भारत के प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं और केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते है ।
  • CSIR विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत है।
  • वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की स्थापना वर्ष 1942 में हुई थी । इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है |
  • इसका उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व से संबंधित वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (NIO)

  • NIO एक बहु-विषयक महासागरीय अनुसंधान संस्थान है । यह ‘वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद’ (Council of Scientific and Industrial Research-CSIR) की घटक प्रयोगशालाओं में से एक है।
  • इसकी स्थापना 1 जनवरी सन् 1966 को हुई थी । इसका मुख्यालय ‘डोना पाउला’ (गोवा) में स्थित है। NIOके तीन क्षेत्रीय कार्यालय कोच्चि (केरल), मुंबई (महाराष्ट्र) और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) में स्थित हैं।
  • इसका संस्थान का कार्य उत्तरी हिन्द महासागर के विशिष्ट समुद्र वैज्ञानिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करना है।

स्रोत: द हिंदू

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