यूरोपीय संघ ने वैश्विक स्तर पर डिजिटल अधिकार एवं सिद्धांत प्रस्तुत किये
डिजिटल अधिकारों और सिद्धांतों की घोषणा यह स्थापित करती है कि जो ऑफलाइन अवैध है, वह ऑनलाइन भी अवैध होना चाहिए।
यह यूरोपीय संघ परिषद की डिजिटल सोसायटी और मूल्य आधारित डिजिटल सरकार पर बर्लिन घोषणा का विस्तार है।
महत्वः
- ये अधिकार एवं सिद्धांत लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र का समर्थन करेंगे तथा एक निष्पक्ष एवं सुरक्षित ऑनलाइन तंत्र सुनिश्चित करेंगे।
- ये नई तकनीकों से निपटने के दौरान नीति निर्माताओं और कंपनियों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेंगे।
- विश्व के देशों के लिए एक मानक के रूप में कार्य करेंगे।
प्रमुख सिद्धांत
- लोगों को डिजिटल परिवर्तन के केंद्र में रखना अर्थात् तकनीकों को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना चाहिए। एकजुटता और समावेशन अर्थात् डिजिटलीकरण से सभी को लाभ मिलना चाहिए।
- लोगों को ऑनलाइन रूप से अपने स्वयं के सूचित विकल्प बनाने में मदद करने के लिए चुननेकी स्वतंत्रता।
- एक स्वस्थ व जीवंत लोकतांत्रिक वाद-विवाद के लिए एक खुले ऑनलाइन परिवेश को बढ़ावा देकरडिजिटल पब्लिक स्पेस में भागीदारी को संभव बनाना।
- सुरक्षा, बचाव और सशक्तीकरण, जिसमें सुरक्षित डिजिटल तकनीकों के उपयोग का अधिकार एवं निजताकी रक्षा शामिल है।
- हरित संक्रमण लक्ष्यों Green transition goals) को प्राप्त करने के लिए हरित डिजिटल प्रौद्योगिकियां।
डिजिटल अधिकारों की रक्षा के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम
- यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019.
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021.
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000.
स्रोत -द हिन्दू