डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की 90वीं जयंती पर श्रद्धांजलि मनाई गई । विदित हो कि वर्ष 2020 में कलाम की जयंती के मौके पर सरकार द्वारा ‘कलाम बौद्धिक संपदा साक्षरता और जागरूकता अभियान’ (KAPILA) कार्यक्रम जारी किया गया था।

ज्ञातव्य हो कि उनकी जयंती को ‘राष्ट्रीय नवाचार दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

परिचय:

  • ए.पी.जे. अब्दुल कलम का जन्म 15 अक्तूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1954 में सेंट जोसेफ कॉलेज से विज्ञान विषय में स्नातक की उपाधि प्राप्त की और वर्ष 1957 में ‘मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (MIT) से वैमानिकी इंजीनियरिंग में महारत हासिल की।
  • वह देश और विदेश के 48 विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से मानद डॉक्टरेट प्राप्त करने वाले भारत के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में से एक हैं।
  • उन्हें प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कारों- पद्म भूषण (1981), पद्म विभूषण (1990) एवं सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न (1997) से भी सम्मानित किया गया।
  • इनको वर्ष 2002 में भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था जिसका कार्यकाल और वर्ष 2007 में पूरा हुआ था । इनकी मृत्यु 27 जुलाई, 2015 शिलांग, मेघालय में हुई ।

उनका योगदान:

  • उन्होंने कई सफल मिसाइलों के निर्माण हेतु कार्यक्रमों की योजना बनाई, जिसके कारण उन्हें “मिसाइल मैन” के नाम से भी जाना जाता है।
  • वह ‘फाइबर ग्लास’ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी थे और उन्होंने इसरो में इसे डिज़ाइन करने और इसके विकास कार्य को शुरू करने हेतु एक युवा टीम का नेतृत्त्व किया था, जिससे ‘कंपोज़िट रॉकेट मोटर’ का उत्पादन संभव हो पाया।

सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV-3):

  • उन्होंने भारत के पहले स्वदेशी ‘सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल’ (SLV-3) को विकसित करने हेतु परियोजना निदेशक के रूप में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया, जिसने जुलाई 1980 में ‘रोहिणी उपग्रह’ का नियर-अर्थ ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया और भारत को स्पेस क्लब का एक विशेष सदस्य बनाया।
  • वह इसरो के प्रक्षेपण यान कार्यक्रम, विशेष रूप से PSLV कॉन्फिगरेशन के विकास हेतु उत्तरदायी थे।

स्वदेशी निर्देशित मिसाइलें:

  • इसरो में दो दशकों तक काम करने और प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकियों में महारत हासिल करने के बाद उन्होंने ‘रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन’ में स्वदेशी निर्देशित मिसाइलों को विकसित करने की ज़िम्मेदारी ली। वह ‘एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम’ (IGMDP) के मुख्य कार्यकारी थे।
  • उन्होंने परमाणु ऊर्जा विभाग के सहयोग से सामरिक मिसाइल प्रणालियों और पोखरण-द्वितीय परमाणु परीक्षणों का नेतृत्त्व किया, जिसने भारत को एक परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बना दिया।

प्रौद्योगिकी विज़न 2020:

  • वर्ष 1998 में उन्होंने ‘टेक्नोलॉजी विज़न-2020’ नामक एक देशव्यापी योजना को सामने रखा, जिसे उन्होंने 20 वर्षों में भारत को ‘अल्प-विकसित’ से विकसित समाज में बदलने के लिये एक रोडमैप के रूप में पेश किया।
  • योजना में अन्य उपायों के अलावा कृषि उत्पादकता में वृद्धि, आर्थिक विकास के वाहक के रूप में प्रौद्योगिकी पर ज़ोर देना और स्वास्थ्य देखभाल एवं शिक्षा तक पहुँच को व्यापक बनाना भी शामिल है।

स्रोत –पीआइबी

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