अफ्रीकी हाथियों का आईयूसीएन द्वारा वर्गीकरण

अफ्रीकी हाथियों का आईयूसीएन द्वारा वर्गीकरण

अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (International Union for Conservation of Nature- IUCN)  ने  अपनी रेड लिस्ट में अफ़्रीकी सवाना हाथी  (बुश) और अफ़्रीकी वन हाथियों को  क्रमशः ‘संकटग्रस्त’(Endangered) और गंभीर संकटग्रस्त’(Critically Endangered) घोषित किया है।

विदित हो की इससे पहले, आईयूसीएन ने हाथियों की इन दोनों प्रजातियों को “अतिसंवेदनशील” माना था।

आईयूसीएन द्वारा किए गए नवीनतम सर्वेक्षण से इस बात का पता चला है की अफ्रीका में हाथियों की दो प्रजातियों को हाथी दांत (आइवरी) के लिए अवैध शिकार और मानव अतिक्रमण के कारण गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

अफ़्रीकी हाथी:

  • एशियाई हाथियों से थोड़े बड़े अफ़्रीकी हाथी पृथ्वी पर पाए जाने वाले सबसे बड़े भू-जानवर हैं। ये लोक्सोडोंटा प्रजाति के हाथी होते हैं।
  • इनमें दो प्रजातियाँ पायी जाती हैं जिनमें एक अफ़्रीकी सवाना हाथी और दूसरा अफ़्रीकी वन हाथी होता है। इन दोनों में सवाना हाथी अपेक्षाकृत बड़ा होता है।
  • हाथियों के समूह का नेतृत्व मादा हाथी द्वारा किया जाता है अर्थात ये मातृसत्तात्मक होते है।
  • अफ्रीकी हाथी अत्यधिक बुद्धिमान होते हैं। उनमें एक बहुत बड़ा और अत्यधिक जटिल मस्तिष्क का आवरण पाया जाता है।
  • अफ्रीकी हाथी एक कीस्टोन प्रजाति के होते हैं, जिसके कारण उनके स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है इसी कारण उन्हें “पारिस्थितिक तंत्र इंजीनियर” के रूप में भी जाना जाता है।

अफ्रीकी सवाना हाथी:

  • इनका वैज्ञानिक नाम लोक्सोडोंटा अफ़्रीकाना है।अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा इन्हें ‘संकटग्रस्त’ श्रेणी के तहत सूचीबद्ध किया गया है। पिछले पांच दशकों में इनकी जनसंख्या में लगभग 60 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी है। इनका निवास स्थान उप-सहारा अफ़्रीकी मैदान हैं।

अफ्रीकी वन हाथी:

  • इनका वैज्ञानिक नाम लोक्सोडोंटा साइक्लोटिस है। अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ द्वारा इन्हें ‘गंभीर-संकटग्रस्त’ श्रेणी के तहत सूचीबद्ध किया गया है।पिछले तीन दशकों में इनकी जनसंख्या में अत्यधिक गिरावट (लगभग 86 प्रतिशत) दर्ज की गई है।इनका निवास स्थान मध्य और पश्चिम अफ्रीका के वनक्षेत्र हैं।

विलुप्ति के कारण:

  • साइट्स (CITES) की एक रिपोर्ट (“हाथी दांत एवं हाथी के अन्य अवयवों के अवैध व्यापार की निगरानी, दिसंबर 2013”) में यह बात कही गई है कि, हाथी दांत का अवैध व्यापार बहुत अधिक बढ़ चुका है। पिछले 16 वर्षों में यह उच्चतम स्तर तक पहुंच चुका है।
  • चरम गरीबी और भ्रष्टाचार युक्त देशों में यह समस्या और भयावह है जिसकी वजह से हाथियों का अवैध व्यापार गंभीर समस्या बनता जा रहा है। ऐसे क्षेत्रों में विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर इस समस्या का काफी हद तक निदान किया जा सकता है।
  • तीव्र जनसंख्या वृद्धि और कृषि हेतु भूमियों का स्थानान्तरण इनके निवास स्थान के लिए गंभीर समस्या है।

एशियाई हाथी:

  • एशियाई हाथी एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े स्थलीय स्तनपायी हैं। ये पश्चिम में भारत से लेकर पूर्व में बोर्नियो द्वीप तक पाये जाते है। ये सूखे जंगल और घास के मैदानों में निवास करते हैं।
  • इसकी तीन उपजातियाँ ऍलिफ़स मॅक्सिमस मॅक्सिमस श्रीलंका में, भारतीय हाथी (ऍलिफ़स मॅक्सिमस इन्डिकस) एशियाई मुख्यभूमि में, तथा ऍलिफ़स मॅक्सिमस सुमात्रेनस इंडोनीशिया के सुमात्रा द्वीप में पायी जाती हैं।
  • आईयूसीएन की रेड लिस्ट में इन्हें ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) श्रेणी के तहत सूचीबद्ध किया गया है।
  • इन्हें भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में और CITES की परिशिष्ट-I मेंसूचीबद्ध करके कानूनी सुरक्षा भी प्रदान की गई है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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