अनाश्रित बच्चों (CiSS) के पुनर्वास पर दिशानिर्देश

अनाश्रित बच्चों (CiSS) के पुनर्वास पर दिशानिर्देश

हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने सड़कों पर रहने वाले बच्चों (CiSS) के पुनर्वास पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्देश जारी किया है।

  • न्यायालय ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्देश जारी किया है, जहां सड़क पर रहने वाले बच्चों (children in street situation: CiSS) के लिए कोई नीति नहीं बनाई गयी है।
  • ऐसे राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया है कि वे ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग’ (NCPCR) द्वारा जारी CiSS बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) 2.0 को तुरंत लागू करें।
  • वर्तमान में, केवल तमिलनाडु और दिल्ली ने ही CiSS बच्चों के बचाव की लिए स्वयं की नीतियां बनाई हैं।
  • पहचान, मान्यता या सामाजिक दर्जा नहीं होने के कारण CiSS बच्चों को अक्सर गुमनाम या अदृश्य माना जाता है। ये कई तरह के अमावों और अपराधों के प्रति अत्यधिक सुभेद्य होते हैं।
  • शिक्षा के अधिकार के बावजूद वे अभी भी स्कूली शिक्षा से वंचित हैं।
  • बाल विवाह, लैंगिक अपराध, तस्करी आदि का जोखिम भी बना रहता है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की पहलें

  • पहचानः बाल स्वराज पोर्टल के अलावा, इसने CiSS बच्चों की पहचान में सहायता करने के लिए गैर-सरकारी संगठनों और व्यक्तियों के लिए एक अलग पोर्टल विकसित किया है। CiSS बच्चों की अनुमानित संख्या 5 लाख है, जबकि बाल स्वराज पोर्टल पर केवल 17,914 ऐसे बच्चों का डेटा अपलोड किया गया है।
  • बचाव और पुनर्वासः NCPCR ने सेव द चिल्ड्रन के साथ मिलकर CiSS बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रिया 20 (SOP 2.0) जारी की है। इसके द्वारा प्रक्रियाओं और उपायों को मजबूत किया गया है।
  • निवारक उपायः उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है, जहाँ CiSS बच्चों की संख्या बहुत अधिक है। ऐसे बच्चों के परिवारों को प्रासंगिक योजनाओं से जोड़ा जाता है।
  • बच्चों के लिए स्कूल जाना सुनिश्चित किया जाता है और उनके माता-पिता के लिए आजीविका सुनिश्चित की जाती है।

NCPCR की मानक संचालन प्रक्रिया 2.0 के बारे में

  • इसका लक्ष्य CiSS बच्चों की देखभाल, सुरक्षा और पुनर्वास हेतु अलग-अलग पदाधिकारियों, संस्थानों/ एजेंसियों आदि के बीच समन्वय करना है।
  • इसके मूल सिद्धांत के तहत बच्चे को उसके परिवार के नजरिये से देखा जाता है। यह CiSS बच्चों के परिवारों के लिए सहायता का एक व्यापक पैकेज प्रदान करता है।
  • इसमें विभिन्न अधिनियमों के तहत प्रावधान, संस्थागत तंत्र, सामाजिक हस्तक्षेप और योजनाबद्ध लाभ शामिल हैं। ये बच्चों के सड़क पर होने के कारणों और अन्य मुख्य मुद्दों का समाधान करने में सहायक होते हैं।
  • इसके तहत परिवार के साथ या परिवार के बिना रहने वाले, दोनों तरह के बच्चों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

स्रोत द हिन्दू

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