शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)

हाल ही में यूनेस्को (UNESCO) ने ‘भारत के लिए शिक्षा की स्थिति रिपोर्ट 2022 ‘शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)’ जारी की है।

यह यूनेस्को की प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट है। वर्ष 2022 की रिपोर्ट चौथा संस्करण है। इस रिपोर्ट का उद्देश्य भारत में शिक्षा में AI के जिम्मेदार और मानव केंद्रित उपयोग के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना है।

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • भारत में AI बाजार के 2% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से वर्ष 2025 तक 7.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
  • AI साक्षरता भारत में अत्यधिक प्रासंगिक होती जा रही है।
  • भारत में AI कौशल प्रसार दर सापेक्ष रूप से विश्व में सर्वाधिक है। यह वैश्विक औसत से 09 गुना अधिक है।

यह रिपोर्ट व्यापक और वैयक्तिकृत (personalized) इंटेलिजेंट शिक्षण प्रणाली (ITS) पर बल देती है। वहीं आज की शिक्षा प्रणाली ‘सभी के लिए एक जैसी पद्धति पर आधारित है, जो त्रुटिपूर्ण है। ITS अधिगम (learning) परिणामों पर नजर रखकर और रियल टाइम में व्यक्तिगत रूप से छात्रों की दक्षताओं का आकलन करके इस समस्या का समाधान करती है।

शिक्षा के क्षेत्र में AI के कार्यान्वयन की चुनौतियां

  • शिक्षा में AI की भूमिका पर नीतियों का अभाव है।
  • संसाधनों और अवसंरचना की कमी शिक्षा में AI के प्रसार को प्रभावित करती हैं।
  • शिक्षा प्रणालियों में AI के लिए प्रशिक्षण डेटा की कमी है।
  • AI आधारित धोखाधड़ी व जालसाजी और AI समर्थित टूल्स की संख्या बढ़ गई है।
  • AI -समर्थित टूल्स के माध्यम से छात्र चीट (जैसे साहित्यिक चोरी) कर सकते हैं।
  • भारत ने भी AI की क्षमता को समझा है। इसी कारण से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा में AI के समेकन पर बल दिया गया है।
  • इसके माध्यम से इंडस्ट्री-4.0 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गुणवत्ता और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा।

रिपोर्ट में की गईं सिफारिशें

  • शिक्षा में AI संबंधी नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • शिक्षा में AI के लिए एक समग्र विनियामक ढांचा प्रदान करने में तेजी लाई जानी चाहिए। प्रभावी सार्वजनिक-निजी भागीदारी सृजित की जानी चाहिए। सभी छात्रों और शिक्षकों की नवीनतम तकनीक तक पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • एल्गोरिदम से जुड़े पूर्वाग्रहों और इससे उत्पन्न भेदभाव को दूर करने का प्रयास किया जाना चाहिए।
  • AI में जनता के विश्वास को बढ़ाने के लिए जरुरी सुधार आवश्यक हैं।
  • AI उत्पादों को विकसित करने में छात्रों और शिक्षाविदों के ज्ञान का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए निजी क्षेत्र से विमर्श किया जा सकता है।

स्रोत द हिन्दू

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