26 मई 2021 को बुद्ध पूर्णिमा का आयोजन

26 मई 2021 को बुद्ध पूर्णिमा का आयोजन

  • 26 मई 2021 को पूरे विश्व भर में बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) मनाई गई। इस अवसर पर भारत के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी।
  • इस पावन अवसर पर भारत के राष्ट्रपति ने कहा कि, “कोविड-19 महामारी के रूप में हमारे सामने अभूतपूर्व संकट है। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर, मैं प्रार्थना करता हूं कि हमारी एकजुटता और सामूहिक प्रयास के माध्यम से हम इस महामारी से सफलतापूर्वक बाहर निकलें और लोगों के कल्याण के रास्ते पर आगे बढ़ते रहें।’’

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima)

  • बुद्ध पूर्णिमा को बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में एक त्यौहार के समान मनाया जाता है।
  • पूर्णिमा के दिन हमें पूरा चंद्रमा दिखाई देता, और यह पूरे प्रकाश की रात होती है, जबकि अमावस्या को घोर अन्धकार होता है।
  • गौतम बुद्ध का जन्म वर्तमान में नेपाल में स्थित लुम्बिनी में 563 ईसा पूर्व को हुआ था । बुद्ध के जन्मदिन की सही तारीख एशियाई लुनिसोलर कैलेंडर पर आधारित है।
  • बुद्ध के जन्मदिन के उत्सव की तारीख हर साल पश्चिमी ग्रेगोरियन कैलेंडर में भिन्न होती है, लेकिन आमतौर पर अप्रैल या मई में आती है।
  • दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में बुद्ध का जन्म को ‘वैसाक’(महोत्सव) के एक भाग के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को बुद्ध के ज्ञान के उपलक्ष्य और मृत्यु शोक के रूप में भी मनाया जाता है, जबकि पूर्वी एशिया में बुद्ध की जागृति और मृत्यु को अलग-अलग मनाया जाता है।

बौद्ध धर्म के संस्थापक

  • सिद्धार्थ गौतम, बौद्ध धर्म के संस्थापक थे, जिन्हें बाद में “बुद्ध” के रूप में जाना गया।
  • गौतम का जन्म एक शाक्य राजघराने (वर्तमान नेपाल) में एक राजकुमार के रूप में हुआ था। यद्यपि उनके पास एक आसान जीवन का विकल्प था, परन्तु संसार के दुखों ने उन्हें द्रवित कर मार्ग परिवर्तन हेतु प्रेरित किया।
  • उन्होंने अपनी भव्य जीवन शैली को त्यागने और गरीबी को सहन करने का फैसला किया।
  • उन्होंने “मध्य मार्ग” के विचार को बढ़ावा दिया, जिसका अर्थ है दो चरम सीमाओं के बीच विद्यमान। इस प्रकार, उन्होंने सामाजिक भोग, वंचित जीवन के मध्य का मार्ग चुना ।
  • बौद्धों का मानना है कि छह साल की तपस्या के उपरांत, गौतम बुद्ध ने बोधि वृक्ष के नीचे ध्यान लगाते हुए आत्मज्ञान पाया। उन्होंने अपना शेष जीवन इस आध्यात्मिक अवस्था को प्राप्त करने के बारे में दूसरों को सिखाने में बिताया।

स्रोत – पी आइ बी

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