21वां भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन – विदेश मंत्रालय

हाल ही में भारत और रूस के 21वें वार्षिक शिखर सम्मेलन (भारत रूस शिखर सम्मेलन) का आयोजन किया गया। शिखर सम्मेलन में प्रधान मंत्री  और रूसी राष्ट्रपति ने भाग लिया।

इसके साथ ही पहली बार दोनों देशों के बीच 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक भी हुई। शिखर सम्मेलन में, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष अन्वेषण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, भारी इंजीनियरिंग, व्यापार और निवेश आदि के क्षेत्रों में 28 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

प्रमुख बिंदु:

  • रूसी राष्ट्रपति ने वर्ष 2022 में 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पीएम को रूस आने का निमंत्रण दिया।
  • दोनों नेताओं ने कोविड से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों के बीच ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ में निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।
  • शिखर सम्मेलन में ‘इंटरनेशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC)’ और प्रस्तावित ‘चेन्नई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर’ के माध्यम से कनेक्टिविटी की भूमिका पर चर्चा हुई।
  • दोनों नेताओं ने रूस के विभिन्न क्षेत्रों, विशेष रूप से रूसी सुदूर पूर्व और भारतीय राज्यों के बीच अधिक अंतर-क्षेत्रीय सहयोग की आशा की।
  • दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि दोनों देश अफगानिस्तान के संबंध में समान दृष्टिकोण और चिंताओं को साझा करते हैं, और अफगानिस्तान पर परामर्श और सहयोग के लिए एनएसए स्तर पर तैयार किए गए द्विपक्षीय रोडमैप की सराहना की।

2+2 संवाद:

‘2+2 डायलॉग’, दो देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों के बीच आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य आम तौर पर रक्षा, सुरक्षा और खुफिया के अधिक एकीकरण सहित द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक रूप से गहरा करने के लिए एक तंत्र बनाना है।

भारत के लिए रूस का महत्व:

  • यद्धपि भारत अपने रक्षा व्यापार भागीदारों में विविधता ला रहा है, रूस महत्वपूर्ण बना हुआ है, जिसका भारतीय रक्षा सूची का लगभग 70% हिस्सा है।
  • रूस भारत का इकलौता रक्षा साझेदार है, जो अब भी भारत को परमाणु पनडुब्बी जैसी अहम तकनीक मुहैया कराने को तैयार है।
  • रूस और चीन के बीच उभरते सामरिक संबंध भारत के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा निहितार्थ हो सकते हैं।
  • रूस ने विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत के लिए अपना “दृढ़ समर्थन” दोहराया है।
  • रूस ने भी परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह में भारत की सदस्यता के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है।

स्रोत – द हिंदू

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