हक्की पिक्की जनजाति समुदाय

हक्की पिक्की जनजाति समुदाय

हाल ही में सूडान में हो रही हिंसा के बीच भारत में कर्नाटक के हक्की पिक्की (Hakki Pikki) जनजाति समुदाय के 181 से अधिक सदस्य हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में फँसे हुए हैं।

हक्की पिक्की जनजाति

  • हक्की पिक्की एक अर्द्ध-घुमंतू जनजाति है जो परंपरागत रूप से पक्षियों को पकड़ती है, और उनका शिकार करती है तथा पश्चिम एवं दक्षिण भारत के वन क्षेत्रों में निवास करती है।
  • यह कर्नाटक की एक अनुसूचित जनजाति है और ऐतिहासिक दृष्टि से राणा प्रताप सिंह के साथ इनका पैतृक संबंध माना जाता है।
  • हक्की पिक्की जनजाति की उत्पत्ति का स्थान गुजरात और राजस्थान माना जाता है जो आंध्र प्रदेश से होते हुए दक्षिण भारत तक पहुँच गए।
  • इस जनजाति को चार कुलों में बाँटा गया है और कर्नाटक में इनकी आबादी 11,892 है।
  • इस जनजाति के गुजराथीओ (Gujrathioa), कालीवाला (Kaliwala), मेवाड़ा (Mewara) और पनवारा (Panwara) चार वंश हैं।
  • इस जनजाति के बीच शादी की सामान्य उम्र महिलाओं के लिये 18 वर्ष और पुरुषों के लिये 22 वर्ष है तथा अंतरावंशीय विवाह को प्राथमिकता दी जाती है।
  • यह समाज मातृसत्तात्मक है और मोनोगैमी आदर्श है।
  • कर्नाटक में हक्की पिक्की हिंदू परंपराओं का पालन करते हैं और सभी हिंदू त्योहार मनाते हैं।
  • हक्की पिक्की के बीच शिक्षा का स्तर अभी भी कम है। हक्की पिक्की अपनी आजीविका के लिये मुख्य रूप से वनों के प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर हैं।
  • सख्त वन्यजीव संरक्षण कानूनों के कारण इस जनजाति को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, जिस कारण शिकार करने के अपने व्यवसाय को छोड़कर उन्होंने स्थानीय मंदिरों में लगने वाले मेलों में हर्बल तेल, मसाले और प्लास्टिक के फूल बेचना शुरू कर दिया।

अफ्रीका में प्रवास:

  • हाल के वर्षों में हक्की पिक्की जनजाति के सदस्य अपने उत्पादों को बेचने हेतु अफ्रीकी देशों की यात्रा करते रहे हैं क्योंकि इस महाद्वीप में आयुर्वेदिक उत्पादों की भारी मांग है।
  • अफ्रीकी देशों के बाज़ारों में बेहतर अवसर उपलब्ध होने के कारण कच्चे संसाधनों जैसे- हिबिस्कस पाउडर, तेल निष्कर्षण, आँवला, आयुर्वेदिक पौधों आदि में निवेश से उच्च रिटर्न प्राप्त होने की संभावना है।

सूडान में हिंसा का कारण:

  • इस देश में हाल ही में दो बलों-सूडान सशस्त्र बल (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच तनावपूर्ण माहौल के कारण हिंसा देखी गई।
  • गैर-सैनिक अधिकारियों को सत्ता सौंपने हेतु सेना के साथ एक राजनीतिक समझौते के रूप में राष्ट्रीय सेना में बलों के विलय के बारे में वार्ता चल रही थी।
  • सेना के भीतर कट्टर गुट शामिल होने के कारण तनाव उत्पन्न हो गया, जिसने बाद में हिंसा का रूप ले लिया।

स्रोत – इंडियन एक्सप्रेस  

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