राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत शहरों में वायु की गुणवत्ता में मामूली सुधार

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत शहरों में वायु की गुणवत्ता में मामूली सुधार

हाल ही में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार शहरों में वायु की गुणवत्ता में मामूली सुधार हुआ है।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने NCAP पर एक प्रगति रिपोर्ट जारी की है । CREA, एक स्वतंत्र अनुसंधान संगठन है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

  • वित्त वर्ष 2021-22 में 131 शहरों में से केवल 49 शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।
  • NCAP के तहत जारी की गई कुल निधि के 50% से भी कम का उपयोग किया गया है।
  • केवल 37 शहरों ने स्रोत विभाजन अध्ययन को पूरा किया, जिन्हें वर्ष 2020 में पूरा कर लिया जाना था।
  • इस अध्ययन के तहत एक शहर में प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की सूची बनाई जाती है तथा उनकी मात्रा निर्धारित की जाती है।

NCAP के बारे में

  • यह देश भर में वायु प्रदूषण की समस्या से व्यापक स्तर पर निपटने के लिए केंद्र सरकार की एक समयबद्ध व राष्ट्रीय स्तर की रणनीति है।
  • इसे वर्ष 2019 में शुरू किया गया था ।
  • इसका लक्ष्य 131 शहरों में वर्ष 2026 (आधार वर्ष 2017 ) तक पार्टिकुलेट मैटर (PM) की सांद्रता में 40% की कमी करना है।
  • 131 शहरों में 123 गैर-प्राप्ति (Non-attainment cities) वाले शहर हैं, जबकि 42 शहर मिलियन प्लस सिटी / शहरी समूह श्रेणी के हैं। दोनों श्रेणियों में 34 शहर कॉमन हैं।
  • प्रारंभिक लक्ष्य के तहत 102 शहरों में वर्ष 2024 तक PM में 20-30% की कमी करना था ।
  • PM 2.5 और PM 10 को नियंत्रित करने के लिए शहर – विशेष (City-specific) कार्य योजनाएं तैयार की गई हैं।
  • प्रगति की निगरानी प्राण / PRANA (पोर्टल फॉर रेगुलेशन ऑफ एयर पॉल्यूशन इन नॉन-अटेन्मेंट सिटीज़) पोर्टल द्वारा की जाती है।

अन्य संबंधित सुर्ख़ियां:

  • वर्ष 2022 में दिल्ली सबसे प्रदूषित शहर (PM 2.5 के लिए ) था । यह डेटा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने जारी किया है।
  • गैर-प्राप्ति वाले शहर ऐसे शहर हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (NAMP) के तहत वर्ष 2011 – 15 की अवधि में राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा नहीं किया था।

ये मानक निम्नलिखित थे:

  • PM 10 – 60 माइक्रोग्राम / क्यूबिक मीटर (वार्षिक), और PM 2.5 – 40 माइक्रोग्राम / क्यूबिक मीटर (वार्षिक) ।

स्रोत – द हिन्दू

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