स्पेक्ट्रम नीलामी

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‘स्पेक्ट्रम नीलामी’ 

  • हाल ही में, दूरसंचार विभाग द्वारा 1 मार्च से 4G स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू करने संबंधी घोषणा की है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी मिलने के बाद देश में 3.92 लाख करोड़ रुपए की लागत की रेडियो तरंगों के स्पेक्ट्रम की नीलामी के छठे दौर के लिये बोली लगाने की प्रक्रिया 1 मार्च, 2020 से शुरू होगी।
  • लंबे समय से प्रतीक्षित यह स्पेक्ट्रम नीलामी चार वर्ष के अंतराल और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण द्वारा रेडियो तरंगों के लिये आधार/आरक्षित मूल्य की गणना तथा इनकी अनुशंसा किये जाने के दो वर्षों से अधिक समय के बाद आयोजित की जा रही है।

पिछली नीलामी:

  • इससे पहले आखिरी/पिछली स्पेक्ट्रम नीलामी वर्ष 2016 में की गई थी। एक नई स्पेक्ट्रम नीलामी की आवश्यकता इसलिये उत्पन्न हुई, क्योंकि कंपनियों द्वारा खरीदी गई एयरवेव्स की वैधता वर्ष 2021 में समाप्त होने वाली है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर, 2020 में 3.92 लाख करोड़ रुपए के आरक्षित मूल्य पर सात आवृत्ति बैंड्स में 2251.25 मेगाहर्ट्ज के स्पेक्ट्रम (4G के लिये) की बिक्री को मंज़ूरी दी थी।

स्पेक्ट्रम बिक्री के प्रमुख उद्देश्य:

  1. उपलब्ध स्पेक्ट्रम के लिए बाजार-निर्धारित मूल्य हासिल करना,
  2. स्पेक्ट्रम का कुशल उपयोग सुनिश्चित करना तथा जमाखोरी को समाप्त करना,
  3. क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और अधिकतम राजस्व अर्जित करना।

कैसे होती है नीलामी:

  • देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सभी संपत्तियों का स्वामित्व केंद्र सरकार के पास है, जिसमें एयरवेव्स भी शामिल हैं।
  • देश में सेलफोन, वायरलाइन टेलीफोन और इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि के साथ समय-समय पर सिग्नलों के लिये अधिक स्थान प्रदान किये जाने की आवश्यकता होती है।
  • साथ ही इन तरंगों को एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँचाने हेतु आवश्यक बुनियादी ढाँचा भी तैयार करना पड़ता है।
  • इस बुनियादी ढाँचे को तैयार करने की इच्छुक कंपनियों को इन संपत्तियों को बेचने के लिये केंद्र सरकार द्वारा दूरसंचार विभाग (संचार मंत्रालय) के माध्यम से समय-समय पर इन एयरवेव्स की नीलामी की जाती है।
  • स्पेक्ट्रम नीलामी प्रक्रिया के तहत, सरकार विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के विशिष्ट बैंडो पर सिग्नलों को प्रसारित करने के अधिकार बेचने और दुर्लभ स्पेक्ट्रम संसाधनों व्यावसायिक समूहों को सौपनें के लिए नीलामी पद्धति का उपयोग करती है।
  • इन एयरवेव्स को स्पेक्ट्रम कहा जाता है, जिसे अलग-अलग आवृत्ति के बैंडों में विभाजित किया जाता है।
  • इन सभी एयरवेव्स को एक निश्चित अवधि के लिये बेचा जाता है, जिसके बाद उनकी वैधता समाप्त हो जाती है, यह अवधि आमतौर पर 20 वर्षों के लिये निर्धारित की जाती है।

भारत में स्पेक्ट्रम की नीलामी

सेलफोन और तार की लाइन वाले टेलीफोन जैसे उपकरणों को परस्पर एक दूसरे से जुड़ने के लिए संकेतों की आवश्यकता होती है। ये सिग्नल वायु-तरंगो पर कार्य करते हैं तथा बाधा-रहित संचरण के लिए इन संकेतों को निर्दिष्ट आवृत्तियों पर भेजा जाता है।

  1. देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सभी परिसंपत्तियों पर केंद्र सरकार का स्वामित्व होता है,इसमें वायुतरंगे एयरवेव भी शामिल होती हैं।
  2. सेलफोन, वायरलाइन टेलीफोन और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि होने के साथ ही समय-समय पर इन संकेतों को अधिक स्थान दिए जाने की आवश्यकता होती है।
  3. इन संकेतो के प्रसारण हेतु अवसंरचना निर्माण करने की इच्छुक कंपनियों के लिए इन परिसंपत्तियों को बेचने हेतुकेंद्र सरकार दूरसंचार विभाग के माध्यम से समय-समय पर वायुतरंगों की नीलामी करती है।
  4. इनवायुतरंगों को स्पेक्ट्रम कहा जाता है। ये स्पेक्ट्रम अलग-अलग आवृत्तियों वाले बैंड्स में उप-विभाजित होते हैं।
  5. इन सभी वायुतरंगों को एक निश्चित अवधि के लिए बेचा जाता है।आम तौर पर यह अवधि 20 वर्ष निर्धारित की जाती है,तथा अवधि पूरी होने के बाद इनकी वैधता समाप्त हो जाती है।

स्पेक्ट्रम नीलामी में भाग लेने हेतु दावेदार:

अपने नेटवर्क पर उपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या की सुविधा हेतु निजी क्षेत्र के सभी तीनों दूरसंचार व्यावसायिक समूह, रिलायंस जियो इन्फोकॉम, भारती एयरटेल, और वोडाफ़ोन-आईडिया (Vi), अतिरिक्त स्पेक्ट्रम खरीदने के लिए पात्र दावेदार हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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