सिंगापुर में दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ

सिंगापुर में दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता लागू हुआ

हाल ही में सिंगापुर,क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) समझौते पर हस्ताक्षर कर इसमें शामिल हो गया है। आरसीईपी चीन की अगुवाई में किया गया दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है।

विदित हो कि इस समझौते में आसियान क्षेत्र के दस देशों के साथ ही आस्ट्रेलिया, चीन, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया शामिल हैं। लेकिन भारत ने अभी तक इस  समझौते को स्वीकार नहीं किया है ।

विशेषज्ञों का कहना था कि यह बड़े उपभोक्ता आधार के साथ एक अहम बाजार होगा और इसमें निर्यात की भी अच्छी संभावनायें होंगी।

सिंगापुर के व्यापार और उद्योग मंत्री चन चुन सिंग ने कहा कि यह समझौता  सिंगापुर के  व्यवसायियों और लोगों के फायदे हेतु हमारे भागीदारों के साथ व्यापार और आर्थिक संपर्को को मजबूत करने की ठोस प्रतिबद्धता का संकेत देता है।

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP)

  • यह आसियान के दस सदस्य देशों तथा पाँच अन्य देशों (ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूज़ीलैंड) द्वारा अपनाया गया एक मुक्त व्यापार समझौता है । इस समझौते पर 15 नवंबर 2020 को हस्ताक्षर किये गए ।
  • हालाँकि नवंबर 2012 में कंबोडिया में आयोजित 12वें आसियान शिखर सम्मेलन के दौरान इस समझौते की प्रारंभिक वार्ताओं की शुरुआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भागीदार सदस्यों के बीच व्यापार नियमों को उदार एवं सरल बनाना है।
  • पिछले वर्ष नवंबर में भारत के आरसीईपी से अलग होने की वजह से इस समझौते पर दस्तखत नहीं हो पाए थे , लेकिन इस वर्ष भारत को छोड़कर बाकी 15 देशों ने इस समझौते पर दस्तखत कर दिया है।
  • आरसीईपी देश विश्व की एक-तिहाई आबादी और वैश्विक जीडीपी के 30 प्रतिशत हिस्से (लगभग 26 ट्रिलियन से अधिक) का प्रतिनिधित्व करते हैं।और देशों में करीब 2 अरब उपभोक्ता निवास करते हैं।

भारत के आरसीईपी से बाहर रहने का कारण

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा ‘एक्ट- ईस्ट पॉलिसी’ पर जोर दिया है। आरसीईपी में शामिल होने पर ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ प्रभावित हो सकती है , क्योंकि आरसीईपी में शामिल होने के लिए भारत को आसियान देशों, जापान तथा दक्षिण कोरिया से आने वाली 90 प्रतिशत वस्तुओं पर से टैरिफ हटाना होगा।
  • इसके अलावा, चीन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड से 74 फीसदी सामान टैरिफ फ्री करना था. इसलिए भारत को डर था कि उसका बाजार चीन के सस्ते माल से भर जाएगा।
  • साथ ही न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पाद के भारतीय बाजार में प्रवेश से भारतीय किसानों के हितों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका थी. इसी वजह से पिछले वर्ष देश के किसान संगठनों ने आरसीईपी में भारत के शामिल होने का विरोध किया था।

आसियान

आसियान (ASEAN) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक संगठन है | इसका पूरा नाम एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स है | आसियान के 10 सदस्य देशों में ब्रुनेई, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, कम्बोडिया ,म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम शामिल हैं |

स्रोत – द हिन्दू

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