सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुधार एजेंडा- ईज़ 4.0 (EASE 4.0) के चौथे संस्करण का अनावरण

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सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुधार एजेंडा- ईज़ 4.0 (EASE 4.0) के चौथे संस्करण का अनावरण

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुधार एजेंडा- ईज़ 4.0 (EASE 4.0) के चौथे संस्करण का अनावरण

हाल ही में वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सुधार एजेंडा- ईज़ 4.0 (EASE 4.0) के चौथे संस्करण का अनावरण किया।

  • इसी के साथ वित्त वर्ष 2020-21 के लिए ईज 3.0 की वार्षिक रिपोर्ट का भी अनावरण किया गया था। इन्हें एन्हांस्ड एक्सेस एंड सर्विस एक्सीलेंस (Enhanced Access and Service Excellence: EASE) की शुरुआत वित्त वर्ष 2019 में की गई थी। यह एक विशिष्ट सुधार सूचकांक पर आधारित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के सुधार एजेंडा का एक हिस्सा है।
  • यह अभिशासन, विवेकपूर्ण उधार, जोखिम प्रबंधन, प्रौद्योगिकी और डेटा संचालित बैंकिंग तथा परिणाम-केंद्रित मानव संसाधन प्रथाओं जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन की अनुमति प्रदान करता है।
  • ईज़ (EASE) सुधारों का उद्देश्य सह-उत्पत्ति वाले ऋणों के समन्वित संचालन के लिए PSBS के मध्यऔर व्यापक वित्तीय सेवा प्रणाली, जैसे गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों NBFCS) के साथ गठजोड़ के माध्यम से सहयोगात्मक बैंकिंग विकसित करना है।
  • ईज़ (EASE) सूचकांक सभी PSBS का एक तुलनात्मक मूल्यांकन प्रदान करता है। इसमें सुधार एजेंडा के मानदंडों और अन्य समकक्षों की तुलना में बैंकों के निष्पादन को दर्शाया जाता है।

ईज़ 3.0 पांच विषयों पर PSB की तुलना करता है:

  • आकांक्षी भारत के लिए स्मार्ट ऋण,
  • प्रौद्योगिकी प्रेरित बैंकिंग सुगमता,
  • विवेकपूर्ण बैंकिंग को संस्थागत बनाना,
  • अभिशासन और परिणाम केंद्रित मानव संसाधन तथा
  • वित्तीय समावेशन और ग्राहक सुरक्षा को सुदृढ़ करना।
  • ईज़ 4.0 का उद्देश्य ग्राहक केंद्रित डिजिटल परिवर्तन के एजेंडे को आगे बढ़ाना तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कार्यप्रणाली में डिजिटल प्रौद्योगिकी और डेटा को गहनता से अंतर्निहित करना है।

इसमें दो नए विषय प्रस्तुत किए गए हैं:

  • लोचशील प्रौद्योगिकी के साथ नए युग की 24×7 बैंकिंग और
  • सहक्रियात्मक परिणामों के लिए सहयोगात्मक बैंकिंग।

सुधारों के प्रमुख लाभ:

  • डिजिटल माध्यमों से ऋण तक बेहतर और सुगम पहुंच।
  • बैंकिंग आवश्यकताओं के लिए घर से ही सुलभ और मोबाइल माध्यमों का त्वरित अंगीकरण।
  • वित्तीय समावेशन से संबद्ध पहलों की पहुँच में निरंतर सुधार।
  • बड़े PSBs ने अग्र-सक्रिय रूप से ऋण प्रदान करने के लिए मौजूदा ग्राहकों की ऋण संबंधी आवश्यकताओं को समझने हेतु उन्नत विश्लेषण क्षमताएं भी स्थापित की हैं।

स्रोत –द हिन्दू

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