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सरकारी प्रतिभूतियाँ

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‘सरकारी प्रतिभूतियाँ’

 

  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लघु निवेशकों के लिए सरकारी प्रतिभूतियों के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर सीधी पहुँच प्रदान की गयी है।
  • इसके बाद से, खुदरा निवेशक सीधे आरबीआई के साथ अपना गिल्ट अकाउंट खोल सकते हैं, और सरकारी प्रतिभूतियों में व्यापार कर सकते हैं।

‘सरकारी प्रतिभूतियाँ’ के सन्दर्भ में महत्वपूर्ण तथ्य:

  • सरकारी प्रति‍भूति‍केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकारों द्वारा जारी किये गए ‘व्यापार योग्य उपकरण’होती हैं।
  • सरकारी प्रतिभूतियों की एक निश्चित या अस्थायी कूपन दर हो सकती है। इन प्रतिभूतियों की गणना बैंकों द्वारा SLR बनाए रखने के लिये की जाती है।
  • यह सरकार के ऋण दायित्व को स्वीकार करता है। ऐसी प्रतिभूतियाँ अल्पकालिक (आमतौर पर एक वर्ष से भी कम समय की मेच्योरिटी वाली इन प्रतिभूतियों को ट्रेजरी बिल कहा जाता है, जिसे वर्तमान में तीन रूपों में जारी किया जाता है, अर्थात् 91 दिन, 182 दिन और 364 दिन) या दीर्घकालिक (आमतौर पर एक वर्ष या उससे अधिक की मेच्योरिटी वाली इन प्रतिभूतियों को सरकारी बॉण्ड या दिनांकित प्रतिभूतियाँ कहा जाता है) होती हैं।
  • भारत में, केंद्र सरकार ट्रेजरीबिलऔर बॉन्ड या दिनांकित प्रतिभूतियाँ दोनों को जारी करती है, जबकि राज्य सरकारें केवल बॉण्ड या दिनांकित प्रतिभूतियों को जारी करती हैं, जिन्हें राज्य विकास ऋण (SDL) कहा जाता है। 
  • चूंकि इन्हें सरकार द्वारा जारी किया जाता है, अतः इनके डिफ़ॉल्ट होने का कोई जोखिम नहीं होता है, और इसलिए, उन्हें जोखिम-मुक्त सुरक्षित उपकरण (Gilt-Edged Instruments) कहा जाता है।
  • केंद्र सरकार, ट्रेजरी बिल और सरकारी बॉन्ड या दिनांकित प्रतिभूतियां, दोनों को जारी करती है।
  • राज्य सरकारें केवल बांड अथवा दिनांकित प्रतिभूतियाँ जारी करती हैं, जिन्हेंराज्य विकास ऋणकहा जाता है।

वर्तमान प्रस्ताव की आवश्यकता:

  • ‘सरकारी प्रतिभूति’बाजार में मुख्यतः संस्थागत निवेशकों, जैसेकि बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों का वर्चस्व है। ये इकाइयाँ 5 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक राशि में व्यापार करती हैं।
  • इसलिए, अल्प राशि के साथ व्यापार करने के इच्छुक छोटे निवेशकों के लिए द्वितीयक बाजार में तरलता उपलब्ध नहीं होती है। दूसरे शब्दों में, इनके निवेश करने का कोई आसान तरीका नहीं मिल पाता है।
  • इस कारण, वर्तमान में, सीधे ‘सरकारी प्रतिभूतियों’ में व्यापार करना, खुदरा निवेशकों के मध्य अधिक लोकप्रिय नहीं है।

स्रोत –द हिन्दू

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