समुद्री पारिस्थितिकी को प्रभावित करने वाली सबसे व्यापक समस्याएं प्लास्टिक प्रदूषण

प्रश्न समुद्री पारिस्थितिकी को प्रभावित करने वाली सबसे व्यापक समस्याएं प्लास्टिक प्रदूषण और समग्र दृष्टिकोण की कमी हैं। चर्चा कीजिए। – 12 December 2021

उत्तरसमुद्र में बढ़ते प्लास्टिक की समस्या ने हाल के वर्षों में गंभीर रूप ले लिया है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण संगठन (यूएनईपी) के अनुसार, समुद्र में प्रवेश करने वाले आधे से अधिक प्लास्टिक कचरा सिर्फ पांच देशों से आता है, जिनमें से चार दक्षिण पूर्व एशिया से हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में पैकेजिंग को लेकर कोई समग्र दृष्टिकोण या नीति नहीं है, जिसके कारण यह समस्या बढ़ती जा रही है। भारत में भी, प्लास्टिक और माइक्रोप्लास्टिक कचरा गंगा सहित अन्य प्रमुख नदियों में प्रवेश करता है, और वहाँ से महासागरों में अपना रास्ता बनाता है।

प्रत्येक वर्ष 300 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है, जिसमें से आधे का उपयोग शॉपिंग बैग, कप और स्ट्रॉ जैसी एकल-उपयोग वाली वस्तुओं को डिजाइन करने के लिए किया जाता है। केवल 9% प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण किया जाता है। लगभग 12% जल जाता है जबकि 79% लैंडफिल में जमा हो जाता है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के अनुसार, हर साल कम से कम 8 मिलियन टन प्लास्टिक महासागरों में समा जाता है।

समुद्री प्लास्टिक कचरे से संबंधित चिंताएं:

  • समुद्री प्लास्टिक के सबसे अधिक दिखाई देने वाले और परेशान करने वाले प्रभावों में से एक सैकड़ों समुद्री प्रजातियों का अंतर्ग्रहण, घुटन और उलझाव है।
  • समुद्री जीव जैसे समुद्री पक्षी, व्हेल, मछली और कछुए प्लास्टिक कचरे को अपना शिकार बनाते हैं और उनमें से ज्यादातर भूख से मर जाते हैं क्योंकि उनका पेट प्लास्टिक के मलबे से भर जाता है।
  • वे घाव, संक्रमण, तैरने की क्षमता में कमी और आंतरिक चोटों से भी पीड़ित हैं। फ्लोटिंग प्लास्टिक भी आक्रामक समुद्री जीवों और बैक्टीरिया के प्रसार में योगदान करते हैं, जो पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करते हैं।
  • प्लास्टिक सामग्री के उत्पादन में उपयोग किए जाने वाले कई रसायनों को कार्सिनोजेनिक माना जाता है और यह शरीर के अंतःस्रावी तंत्र में हस्तक्षेप करते हैं, जिससे मानव और वन्यजीव दोनों में विकासात्मक, प्रजनन, तंत्रिका संबंधी और प्रतिरक्षा संबंधी विकार होते हैं।
  • प्लास्टिक ग्लोबल वार्मिंग में भी योगदान करते है। यदि प्लास्टिक कचरे को जलाया जाता है, तो यह वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड निर्मुक्त करते है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि होती है।
  • प्लास्टिक कचरा हमारे सीवरों को अवरुद्ध कर देता है, समुद्री जीवन के लिए खतरा बन जाता है, और लैंडफिल या प्राकृतिक वातावरण में निवासियों के लिए स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।
  • अक्सर देखा जाता है कि नावें मछली पकड़ने के जाल में फंस जाती हैं या उनके इंजन प्लास्टिक के मलबे से अवरुद्ध हो जाते हैं। यह नौवहन, मत्स्य पालन, जलीय कृषि और समुद्री पर्यटन जैसे उद्योगों के लिए समस्याएं पैदा कर सकता है, जो तटीय समुदाय की आजीविका को प्रभावित करते हैं।
  • आर्थिक लागत के साथ ही समुद्री प्लास्टिक कचरे की सामाजिक लागत भी बहुत अधिक है। तटीय क्षेत्रों के निवासी प्लास्टिक प्रदूषण और ज्वार द्वारा लाए गए कचरे के हानिकारक स्वास्थ्य प्रभावों से सबसे अधिक पीड़ित हैं।

आगे के विकल्प:

  • उत्पादों की डिज़ाइनिंग करना: प्लास्टिक की वस्तुओं की पहचान करना जिन्हें गैर-प्लास्टिक, पुनर्चक्रण योग्य या जैवनिम्नीकृत सामग्री से बदला जा सकता है। साथ ही सभी देशों को प्लास्टिक मूल्य शृंखला में चक्रीय एवं सतत् आर्थिक प्रथाओं को अपनाना चाहिये।
  • उत्पादों का मूल्य निर्धारण: प्लास्टिक कम मूल्य के होते हैं जो पुनर्नवीनीकरण प्लास्टिक को नियोजित करने के लिये कम आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। पर्यावरणीय स्वास्थ्य के साथ मूल्य संरचना को संतुलित करना प्राथमिकता होनी चाहिये।
  • प्लास्टिक मुक्त कार्यस्थल को प्रोत्साहित करना: सभी एकल-उपयोग वाली वस्तुओं को पुनर्चक्रण योग्य वस्तुओं या अधिक सतत् एकल-उपयोग विकल्पों से बदला जा सकता है।
  • निर्माता की जिम्मेदारी का निर्धारण: खुदरा (पैकेजिंग) क्षेत्र में विस्तारित जिम्मेदारी लागू की जा सकती है, जहां उत्पादक उन उत्पादों को इकट्ठा करने और पुनर्चक्रण के लिए जिम्मेदार होते हैं जिन्हें वे बाजार में लॉन्च करते हैं।

नगरपालिका और सामुदायिक कार्रवाई: समुद्र तट और नदी की सफाई, जन जागरूकता अभियान और डिस्पोजेबल प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध और शुल्क।

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