सत्यमेव जयते : केरल डिजिटल साक्षरता अभियान

सत्यमेव जयते : केरल डिजिटल साक्षरता अभियान

  • केरल सरकार ने फेक न्यूज़ के खतरे से निपटने के लिये ‘सत्यमेव जयते’ नाम से एक डिजिटल मीडिया साक्षरता कार्यक्रमकी शरुआत की है।
  • इस कार्यक्रम के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों को जागरूक कराया जाएगा, ताकि डिजिटल मीडिया साक्षरता पर पाठ्यक्रम विकसित करने के लिये प्रोत्साहित किया जा सके।

मुख्य तथ्य:

इस कार्यक्रम में पाँच बिंदु सम्मलित हैं:

  1. गलत जानकारी क्या है?
  2. वे क्यों तेजी से फैल रही हैं?
  3. सोशल मीडिया की सामग्री का उपयोग करते समय किन सावधानियों को अपनाना होगा?
  4. फेक न्यूज़ फैलाने वाले कैसे लाभ कमाते हैं?
  5. नागरिकों द्वारा क्या कदम उठाए जा सकते हैं?

सत्यमेव जयते:भारत का राष्ट्रीय चिह्न

  • सत्यमेव जयते भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है।इसका अर्थ है : सत्य ही जीतता है / सत्य की ही जीत होती है। यह भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के नीचे देवनागरी लिपि में अंकित है।
  • स्वतंत्रता के बाद इसे 26 जनवरी, 1950 को भारत के राष्ट्रीय आदर्श वाक्य के रूप में अपनाया गया था।
  • यह प्रतीक उत्तर भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश में वाराणसी के निकट सारनाथ में 250 ई.पू. में सम्राट अशोक द्वारा बनवाये गए सिंह स्तम्भ के शिखर से लिया गया है, लेकिन उसमें यह आदर्श वाक्य नहीं है।
  • ‘सत्यमेव जयते’ मूलतः मुण्डक-उपनिषद का सर्वज्ञात मंत्र है।

पूर्ण मंत्र इस प्रकार है:

सत्यमेव जयते नानृतम सत्येन पंथा विततो देवयानः।

येनाक्रमंत्यृषयो ह्याप्तकामो यत्र तत् सत्यस्य परमम् निधानम्॥

अर्थात अंततः सत्य की ही जय होती है, न कि असत्य की। यही वह मार्ग है जिससे होकर आप्तकाम (जिनकी कामनाएं पूर्ण हो चुकी हों) मानव जीवन के चरम लक्ष्य को प्राप्त करते हैं।

  • ‘सत्यमेव जयते’ को राष्ट्रपटल पर लाने और उसका प्रचार करने में मदन मोहन मालवीय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
  • चेक गणराज्य और इसके पूर्ववर्ती चेकोस्लोवाकिया का आदर्श वाक्य “प्रावदा वीत्येज़ी” (“सत्य जीतता है”) का भी समान अर्थ है।

फेक न्यूज़क्या है:

फेक न्यूज़ एक तरह की पीत पत्रकारिता (येलो जर्नलिज्म) है। इसके तहत किसी के पक्ष में प्रचार करना व झूठी खबर फैलाने जैसे कृत्य आते हैं। किसी व्यक्ति या संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने या लोगों को उसके खिलाफ झूठी खबर के जरिए भड़काने को कोशिश फेक न्यूज है। सनसनीखेज और झूठी खबरों, बनावटी हेडलाइन के जरिए अपनी रीडरशिप और ऑनलाइन शेयरिंग बढ़ाकर क्लिक रेवेन्यू बढ़ाना भी फेक न्यूज की श्रेणी में आते हैं। फेक न्यूज किसी भी सटायर (व्यंग) या पैरोडी से अलग है,क्योंकि इनका मकसद अपने पाठकों का मनोरंजन करना होता है, जबकि फेक न्यूज का मकसद पाठक को बरगलाने का होता है।

चुनौतियाँ:

  • फेक न्यूज़ एक प्रकार की असत्य सूचना होती है, जिसे समाचार के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अक्सर इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाना या विज्ञापन राजस्व के माध्यम से पैसा कमाना होता है।
  • प्रिंट और डिजिटल मीडिया में फैलने के बाद से, सोशल मीडिया तथा वाहकों के कारण फेक न्यूज़ का प्रसार बढ़ गया हैऔर फेक न्यूज़ वास्तविक समाचार के प्रभाव को कम करके उसका स्थान प्राप्त कर सकती है।
  • राजनीतिक ध्रुवीकरण, पोस्ट-ट्रुथ पॉलिटिक्स, पुष्टि पूर्वाग्रह और सोशल मीडिया को फेक न्यूज़ के प्रसार में फँसाया गया है। देखा गया है कि भारत में फेक न्यूज़ का प्रसार अधिकतर राजनीतिक और धार्मिक मामलों में हुआ है।
  • देश में सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली फेक न्यूज़ एक गंभीर समस्या बन गई है, इसके कारण भीड़ द्वारा हिंसा किये जाने की घटनाएँ भी देखी गई हैं।

फेक न्यूज़ के नियंत्रण हेतु उपाय:

  • प्रायः सरकार सोशल मीडिया पर प्रसारित अफवाहों को फैलने से रोकने के लिये ‘इंटरनेट शटडाउन’ को एक उपाय के रूप में प्रयोग करती है।
  • ‘फेक न्यूज़’ की समस्या का मुकाबला करने के लिये कई विशेषज्ञों ने ‘आधार’ को सोशल मीडिया अकाउंट से जोड़ने जैसे विचार भी सुझाए हैं।
  • भारत के कुछ हिस्सों, जैसे- केरल के कन्नूर में सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में ‘फेक न्यूज़’ के प्रति जागरूकता हेतु कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।
  • सरकार द्वारा आम लोगों को झूठे समाचारों के बारे में अधिक जागरूक बनाने के लिये कई अन्य सार्वजनिक-शिक्षा पहलें शुरू करने की योजना बनाई जा रही है।
  • ‘फेक न्यूज़’ की सत्यता की जाँच करने के लिये भारत में कई फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट आ गई हैं, जिनके माध्यम से आसानी से किसी भी खबर की सत्यता जानी जा सकती है।

स्रोत – पीआइबी, द हिन्दू

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