संयुक्त संसदीय समिति (JPC) : कैसे-कब और क्यों?

संयुक्त संसदीय समिति (JPC): कैसे-कब और क्यों?

हाल ही में विपक्षी दल एक कॉरपोरेट घराने के खिलाफ हिंडनबर्ग रिसर्च हेज फंड के आरोपों की जांच या तो सर्वोच्च न्यायालय की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee :JPC) या भारत के मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग कर रहे हैं।

JPC के बारे में

  • किसी विशेष उद्देश्य के लिए संसद द्वारा एक संयुक्त संसदीय समिति (PC) की स्थापना की जाती है, जैसे किसी विषय या विधेयक की विस्तृत जांच के लिए।
  • यह एक तदर्थ समिति है अर्थात आवश्यकता पड़ने पर गठित की जाती है और इसका कार्यकाल समाप्त होने या इसका कार्य पूरा होने के बाद इसे भंग कर दिया जाता है।
  • JPC में दोनों सदनों और सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के सदस्य होते हैं।
  • संसद के एक सदन द्वारा प्रस्ताव पारित करने और दूसरे सदन द्वारा इस पर सहमति जताए जाने के बादJPC का गठन किया जाता है। JPC के सदस्य संसद द्वारा तय किए जाते हैं।
  • सदस्यों की संख्या भिन्न हो सकती है – अर्थात JPC सदस्यों की कोई निश्चित संख्या नहीं है।
  • अपने मैंडेट को पूरा करने के लिए, JPC दस्तावेजों की जांच कर सकती है और लोगों को पूछताछ के लिए बुला सकती है। इसके बाद यह एक रिपोर्ट प्रस्तुत करती है और सरकार को सिफारिशें करती है।
  • JPC की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं हैं। JPC की सिफारिश के आधार पर सरकार आगे की जांच शुरू करने का विकल्प चुन सकती है, लेकिन उसे ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता ।

अब तक छह JPC गठित की जा चुकी हैं। ये हैं-

  • दूरसंचार लाइसेंस और स्पेक्ट्रम के आवंटन और मूल्य निर्धारण से संबंधित मामलों की जांच करने वाली J PC;
  • शीतल पेय, फलों के रस और अन्य पेय पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों और सुरक्षा मानकों पर JPC;
  • स्टॉक मार्केट घोटाले और उससे संबंधित मामलों पर JPC;
  • प्रतिभूतियों और बैंकिंग लेनदेन में अनियमितताओं की जांच पर JPC;
  • बोफोर्स सौदे की जांच पर JPC;
  • लाभ के पद से संबंधित संवैधानिक और कानूनी स्थिति की जांच करने के लिए JPC।

स्रोत – लाइव मिंट

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