संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद

 

  • संयुक्त राज्य अमेरिका नेहाल ही में घोषणा की है कि वह संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पुनः शामिल होगा।
  • ज्ञात हो तीन साल पहले, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका को‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’ से अलग कर लिया था।
  • परिषद में एक पूर्ण सदस्य के रूप में चुने जाने के उद्देश्य के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका वर्तमान में इसमें एक पर्यवेक्षक के रूप में शामिल होगा।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद:

  • मानवाधिकार परिषद संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के भीतर एक अंतर-सरकारी निकाय है जो विश्व भर में मानवाधिकारों के संवर्द्धन और संरक्षण को मज़बूती प्रदान करने के लिये उत्तरदायी है।
  • इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

संरचना:      

  • इसका गठन 47 संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से मिलकर हुआ है जो संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा चुने जाते हैं।
  • वर्तमान में, ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद’में 47 सदस्य हैं, तथा समस्त विश्व के भौगोलिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने हेतु सीटों का आवंटन प्रतिवर्ष निर्वाचन के आधार पर किया जाता है।
  • परिषद के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होता है और लगातार दो कार्यकाल की सेवा के बाद कोई भी सदस्य तत्काल पुन: चुनाव के लिये पात्र नहीं होता है।
  • किसी देश को एक सीट पर लगातार अधिकतम दो कार्यकाल की अनुमति होती है।

संयुक्त राष्ट्र मानधिकार परिषद के कार्य:

  • परिषद द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों की‘सार्वभौमिक आवधिक समीक्षा‘के माध्यम से मानव अधिकार संबंधी विषयों पर गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव पारित करता है।
  • यह विशेष देशों में मानवाधिकार उल्लंघनों हेतु विशेषज्ञ जांच की देखरेख करता है।
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषदके समक्ष चुनौतियाँ तथा इसमें सुधारों की आवश्यकता है।
  • ‘संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य-देशों जैसे सऊदी अरब, चीन और रूस के मानवाधिकार रिकॉर्ड इसके उद्देश्य और मिशन के अनुरूप नहीं हैं, जिसके कारण आलोचकों द्वारा परिषद की प्रासंगिकता पर सवाल उठाये जाते हैं।

अमेरिका के इससे बाहर होनेके क्या कारण थे ?

  • संयुक्त राष्ट्र मानधिकार परिषद की सदस्यता बहुत सहज थी तथा जिसमें कभी-कभी ऐसे देश भी शामिल होते है, जिन्हें व्यापक मानवाधिकार हनन करने वाले देश के रूप में देखा जाता है।
  • आलोचकों के लिये परिषद की सदस्यता की संरचना एक महत्त्वपूर्ण चिंता का विषय रही है।चीन, क्यूबा, इरिट्रिया, रूस और वेनेजुएला जैसे देश मानवाधिकारों के हनन के आरोप के बावजूद इस परिषद में शामिल रहे हैं।
  • परिषद द्वारा असंगत रूप से इज़राइल पर ध्यान केंद्रित किये जाने के कारण अमेरिका वर्ष 2018 में इससे बाहर हो गया, गौरतलब है कि किसी भी देश की तुलना में परिषद को इज़राइल के संबंध में सबसे अधिक आलोचनात्मक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

स्रोत – द हिन्दू

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