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संदिग्ध मतदाता अथवा डी-वोटर (D-voter or doubtful voter)

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संदिग्ध मतदाता अथवा डी-वोटर (D-voter or doubtful voter)

संदिग्ध मतदाता अथवा डी-वोटर (D-voter or doubtful voter)

  • विदेशी व्यक्तियों के लिए असम में 6 हिरासत केंद्र (Detention Centre) हैं। इन हिरासत केन्द्रों में लगभग 170 व्यक्तियों को रखा गया है।
  • हाल ही में, इनमे से एक हिरासत केंद्र में बचे अंतिम ‘विदेशी’ मणीन्द्र दास को रिहा कर दिया गया हैं एवं अभी 170 व्यक्तियों को रिहा किया जाना बाकी है।
  • ज्ञातव्य हो कि ‘मणीन्द्र दास’ को 2015 में ‘डी-वोटर’ अर्थात ‘संदिग्ध मतदाता’ के रूप में पंजीकृत किया गया था। कुछ समय पश्चात वर्ष 2019 में एक ‘विदेशी अधिकरण’ (Foreigners’ Tribunal- FT) ने इनके खिलाफ एकतरफा निर्णय सुनाते हुए इन्हें एक “विदेशी” घोषित कर दिया था ।

‘डी-वोटर’ या ‘संदिग्ध मतदाता’ कौन होते है?

  • असम में ‘राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर ’ (National Register of Citizens– NRC) को तैयार करते समय उन व्यक्तियों को ‘डी-वोटर’ के रूप में चिह्नित कर लिया गया था, जिन व्यक्तियों की नागरिकता संदेहास्पद या विवादित पाई गई थी।
  • ऐसे व्यक्तियों को नागरिकता अधिनियम, 1955 अथवा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 में भी परिभाषित नहीं किया गया है।

घोषित विदेशी’ कौन होते है?

  • वह व्यक्ति घोषित विदेशी’ (Declared Foreigners-DF), होते हैं, जो राज्य पुलिस की सीमा शाखा द्वारा अवैध अप्रवासी के रूप में हिरासत में लिए जाने पर अपनी नागरिकता का प्रमाण देने में असफल रहते हैं।
  • इसके बाद उन व्यक्तियों को किसी भी एक ‘विदेशी अधिकरण’ (Foreigners’ Tribunal- FT) द्वारा ‘विदेशी’ घोषित कर दिया जाता है।

विदेशी अधिकरण’ क्या होते है?

  • ये, ‘विदेशी (अधिकरण) आदेश’ [Foreigners (Tribunals) Order], 1964 के तहत स्थापित अर्ध-न्यायिक निकाय होते हैं। इन अधिकरणों का काम देश में अवैध रूप से रहने वाले व्यक्ति के बारे यह निर्धारित करना हैं, कि वह ‘विदेशी’ है अथवा नहीं।

विदेशी अधिकरण कीसंरचना

  • ‘विदेशी अधिकरण’ के सदस्यों में, असम न्यायिक सेवा के सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी, न्यायिक अनुभव रखने वाले सिविल सेवक, (जो सचिव या अतिरिक्त सचिव के पद से नीचे सेवानिवृत्त नहीं हुआ हो) तथा न्यूनतम 7 वर्ष के वकालत का अनुभव वाले 35 वर्ष से कम आयु के अधिवक्ता को सम्मिलित किया जाता है।

विदेशी अधिकरणों को स्थापित करने की शक्ति:

  • विदेशी अधिकरण को गृह मंत्रालय द्वारा विदेशी (अधिकरण) आदेश, 1964 में संशोधन किए जाने के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ज़िला मजिस्ट्रेटों को ट्रिब्यूनल स्थापित करने का अधिकार प्रदान किया गया है, जबकि इससे पूर्व, ट्रिब्यूनल स्थापित करने की शक्तियाँ केवल केंद्र के पास निहित थीं।

विदेशी अधिकरणों’ में अपील करने का अधिकार

  • विदेशी (अधिकरण) संशोधन आदेश, 2019 के संशोधित आदेश में सभी व्यक्तियों को अधिकरणों में अपील करने का अधिकार दिया गया है। इसके पहले, केवल राज्य प्रशासन ही किसी संदिग्ध के खिलाफ इन अधिकरणों में मामला दायर कर सकता था।

स्रोत: द हिन्दू

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