श्रीविल्लीपुत्तुर – मेघमलाई बाघ अभयारण्य

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श्रीविल्लीपुत्तुर – मेघमलाई बाघ अभयारण्य

हाल ही में केंद्र द्वारातमिलनाडुमें अवस्थित श्रीविल्लीपुत्तुर-मेघमलाई बाघ अभयारण्य को अनुमोदित किया गया है। यह तमिलनाडु का5वां टाइगर रिजर्व होगा।इस बाघ में अभयारण्य श्रीविल्लिपुथुर ग्रिज़ल्ड गिलहरी और मेघामलाई वन्यजीव अभयारण्यों को भी शामिल किया जायेगा। इस तरह यह भारत का 51वाँ बाघ अभयारण्य होगा।

मुख्य बिंदु:

  • कई पर्यावरण कार्यकर्ता लगभग एक दशक से इन दोनों अभयारण्यों को जोड़ने के लिए एक टाइगर रिज़र्व की मांग कर रहे थे।
  • कार्यकर्ता इस बाघ अभयारण्य को तिरुनेलवेली वन्यजीव अभयारण्य और फिर कलक्कड़ मुंडनथुराई टाइगर रिज़र्व के साथ जोड़ने की मांग कर रहे हैं, ताकि यह एक सन्निहित गलियारा बन सके।
  • वन विभाग के प्रस्ताव में 48 लाख हेक्टेयर भूमि को श्रीविल्लिपुथुर ग्रिज़ल्ड गिलहरी वन्यजीव अभयारण्य, तिरुनेलवेली वन्यजीव अभयारण्य, और मेघामलाई वन्यजीव अभयारण्य को तमिलनाडु के पांचवें बाघ अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया है।
  • अब नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी (NTCA) ने इस नए टाइगर रिजर्व को मंजूरी दे दी है। नया बाघ अभ्यारण्य न केवल वन्यजीव संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि इन जंगलों में वैगई नदी का कायाकल्प भी करेगा।
  • कलक्कड़ मुंडनथुराई और पेरियार टाइगर रिजर्व के निर्माण के साथ, कई दक्षिणी जिलों की पानी की जरूरतें पूरी हुई हैं। नए मेघामलाई-श्रीविल्लिपुथुर टाइगर रिज़र्व के साथ, जंगलों की बेहतर सुरक्षा होगी।
  • सलीम अली सेंटर फॉर ऑर्निथोलॉजी एंड नेचुरल हिस्ट्री (SACON) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाघों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष साक्ष्य ज्यादातर पश्चिमी पठार तक ही सीमित थे। इसरिपोर्ट में मेघामलाई वन्यजीव अभयारण्य के विस्तार की सिफारिश की गई है।

श्रीविल्लीपुत्तुर-मेघमलाई बाघ अभयारण्य पाए जाने वाले प्रमुख जंतु:

मेघमलाई में खुर वाले स्तनपायी, चित्तीदार हिरण, भारतीय गौर, जंगली शूकर आदि वन्य जीव पाए जाते हैं।

श्रीविल्लीपुत्तुर में ग्रिज़ल्ड स्क्विरल (गिलहरी), उड़न गिलहरी, तेंदुआ, नीलगिरि ताहर, सांभर, हाथी, लॉयन टेल्ड मकाक आदि जीव पाए जाते हैं।

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण:

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) का गठन वन्य जीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत किया गया है।

इस निकाय के गठन का उद्देश्य बाघों को अधिनियम के तहत प्रदत्त शक्तियों और कार्यों के अनुसार संरक्षण प्रदान करना है।

यह भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन गठित एक वैधानिक निकाय है।

इसके लिए निकाय समय-समय पर परामर्श तथा आदर्श-मार्गदर्शन निर्गत करता है। ये परामर्श और मार्गदर्शन बाघों की परिस्थिति, संरक्षण के कार्यान्वयन की स्थिति और विशेष रूप से गठित समितियों की अनुशंसाओं पर आधारित होते हैं।

स्रोत – द हिन्दू

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