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शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम – निष्ठा (Teachers Training Programme – NISHTHA)

शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम – निष्ठा (Teachers’ Training Programme – NISHTHA)

हाल ही में ,जनजातीय कार्य मंत्रालय और NCERT एक संयुक्त मिशन ‘एकलव्यमॉडल आवासीय विद्यालय (EMRS)’के शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों हेतु ‘निष्ठा क्षमता निर्माण कार्यक्रम’ के लिए साथ कार्य कर रहे है।

निष्ठा (NISHTHA) क्या है?

“एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार” हेतु क्षमता निर्माण कार्यक्रम – निष्ठा (National initiative for School Heads’ and Teachers’ Holistic Advancement Program- NISHTHA), प्रारंभिक स्तर पर शिक्षण परिणामों में बेहतर सुधार करने वाला एक राष्ट्रीय अभियान है। इसे ‘एकीकृत शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम’ के माध्यम से संचालित किया जाता है। यह संसार में अपनी तरह का सबसे बड़ा शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम है। इसे वर्ष 2019-20 में ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में प्रारंभ किया गया था।

उद्देश्य:

निष्ठा कार्यक्रम का उद्देश्य, छात्रों में आलोचनात्मक सोच विकसित करने तथा इसे प्रोत्साहित करने के लिएशिक्षकों को प्रेरित करना और प्रारंभिक स्तर पर सभी शिक्षकों और स्कूल प्राधानाचार्य की क्षमता का निर्माण करना है।

कार्यान्वयन:

प्रशिक्षण कार्यक्रम, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चिन्हित किये गए 33120 की रिसोर्सपर्सन्स (Resource Persons-KRP) और स्टेट रिसोर्सपर्सन्स (State Resource Persons-SRP) द्वारा सीधे तौर आयोजित कराया जाएगा, और इनके लिए ‘राष्ट्रीय प्रशिक्षण शैक्षिक योजना और प्रशासन संस्थान’ (National Institute of Educational Planning and Administration-NIEPA) ‘राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद’ (National Council of Educational Research and Training-NCERT) ,केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), नवोदय विद्यालय समिति (NVS), केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और गैर-सरकारी संगठन द्वारा द्वाराचिन्हित किए गए 120 ‘नेशनलरिसोर्सपर्सन्स’ द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।

अपेक्षित निष्कर्ष :

  • छात्रों के सीखने के परिणामों में सुधार।
  • एक सक्षम और समृद्ध समावेशी कक्षा परिवेश का निर्माण।
  • शिक्षकों को प्रथम स्तर के परामर्शदाताओं के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वे छात्रों की सामाजिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं के प्रति सतर्क और उत्तरदायी हो सकें।
  • शिक्षकों की ‘कला’ को अध्यापन-कला के रूप में प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे छात्रों की रचनात्मकता में वृद्धि होगी।
  • छात्रों के समग्र विकास हेतु उनके व्यक्तिगत-सामाजिक गुणों को विकसित करने और मजबूत करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • स्वस्थ और सुरक्षित स्कूल परिवेश का निर्माण।
  • शिक्षण-अधिगम और मूल्यांकन में आईसीटी का एकीकरण।
  • सीखने की क्षमता के विकास पर केंद्रित तनाव मुक्त स्कूल आधारित मूल्यांकन विकसित करना।

स्रोत –पीआईबी

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