वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (GMP)

वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (Global Methane Pledge: GMP)

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (GMP) में शामिल हो गया है।

GMP को वर्ष 2021 में COP26 के दौरान लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए कार्रवाई को उत्प्रेरित करना है। इसका नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ करते हैं।

वर्तमान में, इसमें 100 से अधिक देश भागीदार हैं। ये सभी देश सामूहिक रूप से वैश्विक मानव-जनित मीथेन उत्सर्जन के 45% के लिए जिम्मेदार हैं।

सदस्य देश वर्ष 2030 तक मीथेन उत्सर्जन को वर्ष 2020 के स्तरों से नीचे कम-से-कम 30% तक कम करने के लिए सामूहिक रूप से प्रतिबद्ध होते हैं।

भारत GMP का हिस्सा नहीं है। भारत ने व्यापार, देश के विशाल कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन की भूमिका पर इसके प्रभाव से जुड़ी चिंताओं के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

स्रोत –द हिन्दू

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया, वैश्विक मीथेन प्रतिज्ञा (GMP) में शामिल हो गया है।

GMP को वर्ष 2021 में COP26 के दौरान लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य मीथेन उत्सर्जन को कम करने के लिए कार्रवाई को उत्प्रेरित करना है। इसका नेतृत्व संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ करते हैं।

वर्तमान में, इसमें 100 से अधिक देश भागीदार हैं। ये सभी देश सामूहिक रूप से वैश्विक मानव-जनित मीथेन उत्सर्जन के 45% के लिए जिम्मेदार हैं।

सदस्य देश वर्ष 2030 तक मीथेन उत्सर्जन को वर्ष 2020 के स्तरों से नीचे कम-से-कम 30% तक कम करने के लिए सामूहिक रूप से प्रतिबद्ध होते हैं।

भारत GMP का हिस्सा नहीं है। भारत ने व्यापार, देश के विशाल कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन की भूमिका पर इसके प्रभाव से जुड़ी चिंताओं के कारण इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

स्रोत – द हिन्दू

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