श्रीनगर में वितस्ता महोत्सव का आयोजन

श्रीनगर में वितस्ता महोत्सव का आयोजन

हाल ही में केन्द्रीय गृह मंत्री ने श्रीनगर में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित वितस्ता महोत्सव (Vitasta Mahotsav) में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया।

गृह मंत्री ने कहा कि जो लोग झेलम को नदी मानते हैं, उन्हें मानव संस्कृति और उसकी ऊंचाई की पहचान नहीं है। उन्होंने कहा कि झेलम मानव सभ्यता की श्रेष्ठ साक्षी रही है और यहाँ आयोजित ये वितस्ता महोत्सव पूरे विश्व को कश्मीर का दर्शन कराने वाला एक महोत्सव है।

वितस्ता महोत्सव का उद्देश्य पूरे देश को कश्मीर की महान सांस्कृतिक विरासत, विविधता और विशिष्टता से परिचित कराना है।

यह महोत्सव वितस्ता (झेलम) नदी से जुड़ी लोक मान्यताओं पर केंद्रित है, जिसे वैदिक काल से ही बहुत पवित्र माना जाता है।

इस नदी का उल्लेख नीलमत पुराण, वितस्ता महामाया, हरचरिता चिंतामणि, राजतरंगिणी जैसे कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और ऐसा माना जाता है कि इस पूजनीय नदी की निर्मल धाराएं, मानव स्वभाव के सभी अपकृत्यों का नाश कर देती हैं।

झेलम नदी

झेलम नदी पाँच प्रमुख सहायक नदियों; सतलुज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम में से एक प्रमुख सहायक नदी है जो अंततः पाकिस्तान में सिंधु नदी में विलीन हो जाती हैं।

झेलम पश्चिम की ओर बहने वाली नदी हैं।

झेलम (कश्मीरी में व्येथ, संस्कृत में वितस्ता और ग्रीक में हाईडेस्पीज) कश्मीर घाटी का मुख्य जलमार्ग है।

झेलम नदी ” चश्मा वेरिनाग” नामक एक शानदार झरने से निकलती है जो कश्मीर घाटी के दक्षिण पूर्वी कोने में बनिहाल दर्रे की तलहटी में स्थित है।

इस नदी के बेसिन में 4675 मीटर ऊँची कुटी और ब्रह्मसकल की सबसे ऊंची चोटियाँ हैं। लिद्दर नदी, झेलम नदी के जल का मुख्य स्रोत है।

स्रोत – पी.आई.बी.

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