लीडरशिप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (लीडआईटी)

लीडरशिप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन (लीडआईटी)

हाल ही में, भारत और स्वीडन ने अपनी संयुक्त पहल अर्थात ‘लीडरशिप फॉर इंडस्ट्री ट्रांजिशन’ (Leadership for Industry Transition – LeadIT) के एक हिस्से के रूप में ‘स्टॉकहोम’ में ‘उद्योग अवस्थांतर वार्ता’ (इंडस्ट्री ट्रांजिशन डायलॉग) की मेजबानी की।

लीडआईटी (LeadIT) के बारे में:

  • ‘लीडरशिप ग्रुप फॉर इंडस्ट्री ट्रांज़िशन’ (LeadIT) निजी क्षेत्र की कंपनियों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से विशेष रूप से आयरन एंड स्टील, एल्युमिनियम, सीमेंट और कंक्रीट, पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक, ईंटों, भारी शुल्क परिवहन आदि जैसे कठिन क्षेत्रों में कार्बन उत्सर्जन को कम करने को प्रोत्साहन देने के लिए एक स्वैच्छिक पहल है।
  • यह पहल, ‘पेरिस समझौते’ को पूरा करने एवं कार्रवाई करने के लिये प्रतिबद्ध देशों और कंपनियों को एकत्रित करती है।
  • इसे वर्ष 2019 के ‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु कार्रवाई शिखर सम्मेलन’ में स्वीडन और भारत की सरकारों द्वारा लॉन्च किया गया था और इसे ‘विश्व आर्थिक मंच’ का समर्थन प्राप्त है।
  • लीडआईटी के सदस्य इस विचार को बढ़ावा देते हैं कि वर्ष 2050 तक ऊर्जा-गहन उद्योगों में निम्न-कार्बन उत्सर्जन के उपायों को अपनाकर ‘शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन’ प्राप्त करने के लक्ष्यों की पूर्ति की जा सकती है।
  • इसके प्रबंधन बोर्ड में, स्वीडन, भारत और विश्व आर्थिक मंच के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
  • लीड आईटी का सचिवालय, लीडरशिप ग्रुप के काम के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है और स्टॉकहोम पर्यावरण संस्थान (Stockholm Environment Institute) द्वारा इसकी मेजबानी की जाती है।
  • वर्तमान में, इस समूह में भारत से डालमिया सीमेंट, महिंद्रा समूह और स्पाइसजेट सहित कुल 16 देश और 19 कंपनियां शामिल हैं।

लीडआईटी पहल का महत्व:

उद्योग क्षेत्र मिलकर कुल CO2 उत्सर्जन में लगभग 30% का योगदान करते हैं। इसलिए, पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उद्योग क्षेत्र को ‘निम्न कार्बन’ विकास मार्ग पर चलाने के लिए लीडआईटी जैसी पहल महत्वपूर्ण हैं।

स्रोत द हिन्दू

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