लाइट हाउस प्रोजेक्ट

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लाइट हाउस प्रोजेक्ट

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छह राज्यों में लाइट हाउस प्रोजेक्ट (एलएपी)) की नींव रखी। उन्होंने वैश्विक आवासीय प्रौद्योगिकी चुनौती / ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज-इंडिया के तहत लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स एलएपी की आधारशिला रखेंगे।
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  • लाइट हाउस प्रोजेक्ट केंद्रीय शहरी मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके तहत लोगों को स्थानीय जलवायु और इकोलॉजी का ध्यान रखते हुए टिकाऊ आवास प्रदान किए जाते हैं। Light house Current Affair January
  • लाइट हाउस प्रोजेक्ट के लिए देश भर से 6 राज्यों को चुना गया है, उनमें त्रिपुरा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु शामिल हैं।
    क्या है विशिष्टता?

  • इस प्रोजेक्ट में खास तकनीक का इस्तेमाल कर सस्ते और मजबूत मकान बनाए जाते हैं।

इस प्रोजेक्ट में फैक्टरी से ही बीम-कॉलम और पैनल तैयार कर घर बनाने के स्थान पर लाया जाता है, इसका फायदा ये होता है कि निर्माण की अवधि और लागत कम हो जाती है,इसलिए प्रोजेक्ट में खर्च कम आता है।

इस प्रोजेक्ट के तहत बने मकान पूरी तरह से भूकंपरोधी होंगे।‘लाइट हाउस प्रोजेक्ट’ क्या हैं?

लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स आवास निर्माण के क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए एक समग्र परिवेश तैयार करने की परिकल्पना है।

लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स का निर्माण इंदौर (मध्य प्रदेश), राजकोट (गुजरात), चेन्नई (तमिलनाडु), रांची (झारखंड), अगरतला (त्रिपुरा) और लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में किया जा रहा है।

इसमें प्रत्येक स्थान पर संबद्ध बुनियादी ढांचा सुविधाओं के साथ लगभग 1,000 मकानों को शामिल किया गया है।

ये परियोजनाएं पारंपरिक तौर पर ईंट एवं कंक्रीट वाले निर्माण के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से, अर्थात महज बारह महीने के भीतर रहने के लिए तैयार मकानों को प्रदर्शित और वितरित करेंगी। इसके अलावा ये मकान उच्च गुणवत्ता के साथ किफायती और टिकाऊ भी होंगे।

हल्के मकानों की ये परियोजनाएं (एलएपी)कई प्रकार की तकनीकों का प्रदर्शन करती हैं। जिसमें इंदौर के एलएचपी में प्रीफैब्रिकेटेड सैंडविच पैनल सिस्टम, टनल फॉर्मवर्क आदि का उपयोग शामिल है।
  • ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज (जीएचटीसी) की प्रमुख विशेषताएं:
  • 2019 में शुरू की गई वैश्विक आवासीय प्रौद्योगिकी चुनौती, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत एक चुनौती कार्यक्रम है।
  • जीएचटीसी का लक्ष्य किफायती आवास के निर्माण को तेजी से पूरा करके वर्ष 2022 तक 2 करोड़ घरों के निर्माण के लक्ष्य को पूरा करना है।
  • जीएचटीसी लाइट हाउस प्रोजेक्ट्स के लिए उपयोगी साबित हो चुकी प्रदर्शन-योग्य प्रौद्योगिकियों की पहचान करना और उनके उपयोग को मुख्यधारा में लाने पर ध्यान केंद्रित करता है।इसके अलावा, ग्लोबल हाउसिंग टेक्नोलॉजी चैलेंज के तहत अफोर्डेबल सस्टेनेबल हाउसिंग एक्सेलेरेटर्स- इंडिया अर्थात (आशा–इंडिया ) के माध्यम से ऊष्मायन और त्वरित सहयोग के लिए संभावित भविष्य की तकनीकों को चिह्नित किया जाता है।

  • जीएचटीसी -इंडिया
    आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय पहले ही जीएचटीसी की शुरूआत कर चुका है।

इस चुनौती के तीन घटक हैं:

  1. ग्रांड एक्‍सपो एवं सम्‍मेलन का आयोजन करना।
  2. दुनिया भर से प्रमाणित प्रदर्शन योग्‍य प्रौद्योगिकियों की पहचान करना।
  3. ऊष्‍मायन और त्‍वरित सहायता के लिये किफायती, स्‍थायी आवास की स्‍थापना के माध्‍यम से संभावित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देना।
स्रोत-पीआईबी, द हिन्दू
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