रेट्रो टैक्स – सरकार द्वारा मुकदमेबाजी का समाधान

रेट्रो टैक्स : सरकार द्वारा मुकदमेबाजी का समाधान

हाल ही में रेट्रो टैक्स सरकार द्वारा मुकदमेबाजी का समाधान करने के लिए नियमों का प्रारूप जारी किया गया है ।

इन नियमों के प्रारूप को कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत लाया गया है। यह संशोधन वित्त अधिनियम 2012 द्वारा आरंभ किए गए पूर्वव्यापी कराधान (Retrospective taxation) उपायों में संशोधन का प्रस्ताव करता है।

वर्ष 2012 में आयकर अधिनियम में संशोधन का उद्देश्य भारत में पूंजीगत लाभ कर देयता के अधीन आए बिना विदेशों में निगमित संस्थाओं के तहत भारतीय व्यवसायों का परिचालन करने संबंधी कार्यकलापों की जांच करना था। साथ ही, इस संशोधन अधिनियम को पूर्वव्यापी संव्यवहारोंपर लागू किया जाना था।

कराधान अधिनियम 2021 का उद्देश्य कर संबंधी निश्चितता लाना है।साथ ही, यह सुनिश्चित करना है कि एक बार निर्दिष्ट शर्तों को पूरा करने के उपरांत लंबित आयकर कार्यवाही वापस ले ली जाएगी। यदि कोई मांग उठाई जाती है, तो उसे रद्द कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एकत्रित की गई राशि यदि कोई है, तो उसे बिना किसी ब्याज के करदाता को वापस कर दिया जाएगा।

नए नियम, अधिनियम 2021 द्वारा किए गए संशोधन को प्रभावी करने के लिए आयकर नियम, 1962 में संशोधन करते हैं।

नियमों के प्रारूप में वादों को वापस लेने के लिए एक तंत्र, भविष्य के किसी भी मुकदमे से क्षतिपूर्ति तथा विदेशों में भारतीय संपत्ति को घेरने (ring-fencing) और मामले के चरणबद्ध निपटान के लिए समय-सीमा काप्रस्ताव करते हैं।

पूर्वव्यापी कराधान, किसी देश को संबंधित विधि के अधिनियमित होने से पूर्व की अवधि के लिए किसी निश्चित उत्पादों, वस्तुओं या सेवाओं और करारों तथा कंपनियों पर प्रभार आरोपित करने हेतु कर संबंधी नियम को पारित करने की अनुमति प्रदान करता है।

नियमों के मसौदे में किये गए प्रयास

  • कंपनियों और इक्छुक पक्षकारों को सभी अभियोगों को परिवर्तनीय रूप से वापस लेना होगा
  • पक्षकारों को दावों, लागतों हर्जाने आदि का स्थाई रूप से त्याग करना होगा
  • पक्षकारों को वचन – पत्र देने के 60 दिनों में सभी अभियोगों को वापस लेना होगा
  • वचन –पत्र प्रदान करेंगे की वे कभी भविष्य में अभियोग नहीं करेंगे
  • राहत अनुदत्त करने वाले आदेश के30 दिनों में प्रतिदाय जारी किये जायेंगे

निगरानी रखना

  • रेट्रो टैक्स से प्रभावित केयर्न, वोडाफोन और 15 अन्य की निगरानी।
  • समाधान संबंधी संभावनाओं का निर्धारण करने के लिए नियमों की प्रतीक्षा कर रही कंपनियों की निगरानी।
  • समझौता वार्ता के लिए सरकार से किए गए संपर्क की निगरानी।

स्रोत – द हिन्दू

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