राष्ट्रीय बालिका दिवस

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27 jan 2021, करंट अफेयर्स, हिन्दी करंट अफेयर्स, सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय बालिका दिवस, बालिका दिवसराष्ट्रीय बालिका दिवस

 

  • भारत में हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। यह महिला और बाल विकास मंत्रालय की एक पहल है।
  • इसका उद्देश्य बाल लिंग अनुपात (Child Sex Ratio- CSR) में होनी वाली कमी के मुद्दे पर जागरूकता फैलाना है।
  • यह समारोह, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ (Beti Bachao, Beti Padhao– BBBP) योजना की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
  • पंजाब सरकार द्वारा ‘जनवरी, 2021’ को ‘बालिका माह’ घोषित किया गया है तथा ‘धीयाँ दी लोहड़ी’ (Dheeiyan Di Lohri) योजना भी शुरू की गई है।

 ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ (BBBP) के बारे में:

  • आरंभ एवं विस्तार: ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ कार्यक्रम की शुरुआत जनवरी, 2015 में हरियाणा के पानीपत में की गयी थी। 8 मार्च, 2018 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढाओ’ कार्यक्रम को देश के सभी 640 जिलों (जनगणना 2011 के अनुसार) में शुरू किया गया।
  • यह, तीन केंद्रीय मंत्रालयों, महिलाओं और बाल विकास, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और मानव संसाधन विकास मंत्रालयों का संयुक्त प्रयास है।

कार्यान्वयन:

यह एक केंद्रीय क्षेत्रक योजना है। इसके तहत जिला स्तर पर योजना घटक को 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और इसके सुचारू संचालन हेतु सहायता राशि सीधे जिलाधिकारी / जिला कलेक्टर के खाते में जारी की जाती है।

उद्देश्य:

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य बाल लिंग अनुपात (CSR) में होने वाली कमी तथा जीवन-चक्र सातत्य के संदर्भ में महिलाओं के सशक्तीकरण से संबंधित मुद्दों का समाधान करना है।
  • इस योजना के विशिष्ट उद्देश्यों में लैंगिक रूप से पक्षपातपूर्ण चयनात्मक लिंग उन्मूलन को रोकना; बालिकाओं के जीवन और सुरक्षा को सुनिश्चित करना तथा बालिकाओं की शिक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करना शामिल है।

योजना के परिणाम:

  • स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार के आशाजनक रुझान दिखाई दे रहे हैं और इसमें वर्ष 2014-15 में 918 से 16 अंकों का सुधार होकर वर्ष 2019-20 में 934 हो चुका है।
  • प्रसवपूर्व देखभाल की पहली तिमाही के दौरान स्वास्थ्य प्रतिशत में सुधार की प्रवृत्ति दिखाई देती गई, और यह वर्ष 2014-15 में 61 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2019-20 में 71 प्रतिशत हो गया है।

माध्यमिक स्तर पर स्कूलों में लड़कियों के सकल नामांकन अनुपात भी वर्ष 2014-15 के 77.45 प्रतिशत से बढ़ कर वर्ष 2018-19 में 81.32 प्रतिशत हो गया है।

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