पांचवे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण निष्कर्षों का अध्ययन करने हेतु समिति

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पांचवे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण निष्कर्षों का अध्ययन करने हेतु समिति 

  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारापांचवे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में प्राप्त प्रतिकूल निष्कर्षों की जांच करने हेतु एक तकनीकी विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है।
  • इस समिति की अध्यक्षता परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिवप्रीति पंतको सौंपी गयी है और इसमें औषधि एवं पोषण विशेषज्ञों को भी सम्मिलित किया गया है।
  • समिति मेंकर्नाटक, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के राज्य कार्यक्रम अधिकारीभी शामिल किए गए हैं।

समिति का अधिदेश:

समिति को कुपोषण, बौनापन रक्ताल्पता और सी-सेक्शन संबंधी संकेतकों को बेहतर बनाने हेतु प्रकार्यात्मक और नीतिगत हस्तक्षेपों की सिफारिश करने का कार्य सौंपा गया है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 के प्रमुख निष्कर्ष:

  • पांचवे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में 130 से अधिक मापदंडों पर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के आंकड़े पेश किये गए हैं। विभिन्न मापदंडों पर कई राज्यों ने पिछले सर्वेक्षण के (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4: 2015-16) की तुलना में खराब प्रदर्शन किया है।
  • अधिकांश भारतीय राज्यों मेंनवजात शिशु और बाल मृत्यु दरों में गिरावटआई है।
  • सिक्किम, असम, गोवा और जम्मू और कश्मीर राज्यों मेंनवजात मृत्यु दर (नेशनल मोर्टेलिटी रेट – एनएम्आर), शिशु मृत्यु दर (इन्फेंट मोर्टेलिटी रेट–आईएमआर) और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (अंडरफाई -मोर्टेलिटी रेट ) में काफी गिरावटदेखी गयी है।
  • सर्वेक्षण में भाग लेने वाले सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में, बिहार मेंशिशु और बाल मृत्यु दर की तीनों श्रेणियों मेंउच्चतम वृद्धि देखी गई, जबकि केरल में सबसे कम बाल मृत्यु दर दर्ज की गई।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 निष्कर्षों का महत्व:

  • बाल कुपोषण में भारी वृद्धि और सामान्यतः महिलाओं तथा गर्भवती महिलाओं में रक्ताल्पता के बढ़ते स्तर का स्पष्ट रूप से मतलब है कि 2015-2019 के दौरान जन्म लेने वाले बच्चे दुर्बलता अथवा अक्षमताओं से पीड़ित हो सकते हैं।
  • हालाँकि, भारत में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण NFHS 3 (2005-06) और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 4 (2015-16) के मध्य बाल कुपोषण में सुधार देखा गया था, किंतु राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 परिणामों के अनुसार, बच्चों के बीच कुपोषण के मामले में देश ने नकारात्मक राह पकड़ ली है।

स्रोत: द हिंदू

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