यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी शुक्र ग्रह के लिए भेजेगी ‘एनविज़न मिशन’

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी शुक्र ग्रह के लिए भेजेगी एनविज़न मिशन

हाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा शुक्र ग्रह पर दो मिशन भेजने का निर्णय लिया गया था। अब इसके बाद यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (European Space Agency – ESA) ने भी शुक्र ग्रह (Venus) के अध्ययन हेतु ‘एनविज़न मिशन’ (EnVision) नामक एक प्रोब की घोषणा की है।

एनविज़न (EnVision)

  • ‘एनविज़न’ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के नेतृत्व में एक अंतरिक्ष अभियान है। इसमें नासा (NASA) का सहयोग भी लिया जा रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA)2030 तक अपने प्रोब को लांच करेगा।
  • इस मिशन को ‘एरियन 6’ नामक रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा। ‘एनविज़न’ अंतरिक्ष यान को शुक्र ग्रह तक पहुंचने में लगभग पंद्रह माह लगेंगे एवं परिक्रमा कक्षा में स्थापित होने में 16 माह और लग सकते हैं।
  • इस मिशन का उद्देश्य शुक्र ग्रह के वायुमंडल में पाई जाने वाली गैसों (trace gases) की निगरानी करना एवं शुक्र ग्रह की के सतह की संरचना का विश्लेषण करना है। यह मिशन पता लगाएगा कि कैसे और क्यों शुक्र और पृथ्वी इतने अलग-अलग विकसित हुए हैं।
  • यह शुक्र ग्रह के आंतरिक कोर से ऊपरी वायुमंडल तक ग्रह का समग्र दृश्य (holistic view) प्रदान करेगा। इसके लिए नासा द्वारा उपलब्ध कराया गया एक रडार, ग्रह की सतह का चित्रण करने और उसका मानचित्र तैयार करने का कार्य करेगा।

शुक्र के लिए अन्य मिशन

  • विदित हो कि ‘नासा’ ने हाल ही में दाविन्ची+ (DAVINCI+) और वेरिटास (VERITAS) नामक मिशन, शुक्र ग्रह के वातावरण में प्रवेश करने के लिए तैयार किये हैं।
  • इससे पहले ‘यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी’ द्वारा ‘वीनस एक्सप्रेस’ (Venus Express) नामक एक मिशन शुक्र ग्रह के लिए भेजा था। इसका उद्देश्य वायुमंडलीय अनुसंधान करना और ग्रह की सतह पर ज्वालामुखीय हॉटस्पॉट का पता लगाना था।
  • विदित हो कि सोवियत संघ द्वारा शुक्र ग्रह के लिए पहला अंतरिक्ष यान ‘वेनेरा सीरीज’ (Venera series) भेजा गया था। इसके पश्चात नासा के मैगलन (Magellan) मिशन (1990-1994) ने शुक्र ग्रह का अध्ययन किया।

इन अभियानों से वैज्ञानिक निम्नलिखित प्रश्नों का समाधान चाहते हैं:

  • शुक्र को अपनी वर्तमान अवस्था में पहुचने हेतु किन- किन स्थितियों से गुजरना पड़ता है और क्या यह कोई भविष्य-का संकेत देता है कि पृथ्वी को भी ऐसे ही विनाशकारी ग्रीनहाउस प्रभाव से गुजरना पड़ेगा?
  • क्या शुक्र ग्रह अभी भी भूगर्भीय रूप से सक्रिय है?
  • क्या इस ग्रह पर कभी कोई महासागर या किसी प्रकार का कोई जीवन था?
  • जब हम पृथ्वी जैसे अन्य बाह्य ग्रहों की खोज करते हैं, तो स्थलीय ग्रहों के विकास के बारे में सामान्यतः क्या सबक सीखा जा सकता है?

शुक्र ग्रह वैज्ञानिकों को क्यों आकर्षित कर रहा है?

  • आंतरिक सौर मंडल में शुक्र पृथ्वी का निकटतम पड़ोसी ग्रह है और आकार और संरचना में पृथ्वी के समान है। लेकिन इसके बावजूद दोनों ग्रहों का अलग-अलग विकास हुआ है।
  • शुक्र ग्रह, पृथ्वी की तरह रहने योग्य नहीं है, लेकिन इसने गंभीर जलवायु परिवर्तन देखे हैं।
  • इसने एक जहरीला वातावरण विकसित किया है जो घने सल्फ्यूरिक एसिड युक्त बादलों से घिरा हुआ है।

शुक्र ग्रह :

  • शुक्र (Venus)आकाश में चंद्रमा के बाद दूसरा सबसे चमकीला पिंड है। यह अपने चारो ओर घने बादलों के आवरण कारण चमकीला दिखाई देता है, इन्ही बादलों से प्रकाश का परावर्तन और प्रकीर्णन हो जाता है।
  • यह सूर्य का दूसरा निकटतम ग्रह है। समान आकार के कारण इसे पृथ्वी का जुड़वां ग्रह कहा जाता है।

शुक्र ग्रह, पृथ्वी से किस प्रकार भिन्न है?

  • शुक्र ग्रह का वायुमंडल अत्याधिक सघन है, वायुमंडलीय सघनता के कारण ऊष्मा का प्रवाह बाहर की ओर नही हो पाता है। यही कारण है किसूर्य के सबसे नजदीक स्थित ‘बुध’ ग्रह के बाद आने पर भीयह सौरमंडल का सबसे गर्म ग्रह है।
  • शुक्र ग्रह पर सतह का तापमान 471 डिग्री सेल्सियस तक पहुच सकता है, जो कि सीसा को पिघलाने के लिए पर्याप्त होता है।
  • शुक्र अपनी कक्षा में सूर्य के चारों ओर गति करता है, किंतु अपनी धुरी पर धीमी गति से पीछे की ओर घूमता है। इसका मतलब है कि शुक्र ग्रह पर सूर्य पश्चिम में उगता है और पूर्व में अस्त होता है।शुक्र ग्रह का कोई चंद्रमा नहीं है और न ही इसके चारो ओर कोई वलय है।

स्रोत : इंडियन एक्सप्रेस

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