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General Studies-I/History/Art & Culture

भारतीय संस्कृति में प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू शामिल होंगे।

Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

2.  “विजयनगर साम्राज्य की हिंदू पहचान प्रतिक्रियावादी नहीं थी।इस कथन का परीक्षण कीजिए।

The Hindu identity of the Vijayanagar empire was not reactionary”  Examine this statement?

उत्तर 

मध्यकालीन इतिहास में दक्षिणी भारत में विजयनगर साम्राज्य के उत्थान, विकास और पतन को हिंदू पहचान के साथ जोड़कर देखा जाता है। उत्तरी भारत में दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य ने मध्यकालीन इतिहास में वर्चस्वकारी जगह बनाई है। ऐसे में दक्षिण भारत में इस साम्राज्य को हिंदू सभ्यता के गौरव से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन विजयनगर साम्राज्य की नीतियों में हिंदुत्व की बात सही नहीं है क्योंकि उसकी नीतियों में हिंदू पहचान को आगे बढ़ाने का एजेंडा कभी भी नहीं रहा, इरादतन भी नहीं और प्रतिक्रिया-स्वरूप भी नहीं। विजयनगर साम्राज्य अपने आत्मविश्वास के आधार पर आगे बढ़ रहा था उसने धार्मिक पहचानों का सहारा इसके लिए नहीं  लिया।

  1. विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य कला को हिंदू धर्म से जोड़कर देखा जाता है लेकिन इनकी शैलियों में प्रारंभ से स्थानीय शैलियों का प्रभाव है, और आगे दक्षिण भारत में विस्तार होता है तब वहां के तत्त्व में दिखाई देने लगते हैं। इसी प्रकार फारस के सम्पर्क के फलस्वरूप स्थापत्य कला में भी नजर आया।
  2. विजयनगर की पराजय वाले 1565 के युद्ध को भी विजयनगर ने सांप्रदायिक रंग नहीं दिया, जबकि माना जाता है कि मुस्लिम सुल्तान ने ऐसा किया था।
  3. बाहरी लोगों ने भी इनके बीच संघर्षों को सांप्रदायिक प्रकृति का नहीं माना, क्योंकि कई मुस्लिम सेनापति विजयनगर की सेना में थे और कई मराठा सेनापति सुल्तान की तरफ से लड़ रहे थे। कई व्यापारियों ने दोनों पक्षों की घोड़ों की बिक्री की।
  4. विजयनगर शासकों ने फारस से आने वाले यात्रियों का स्वागत किया और वहां के शाह के राजकाज में रुचि व्यक्त की थी। जो यह दर्शाता है कि वे खुद को सांप्रदायिकता में समेटकर नहीं रखना चाहते थे। 

निष्कर्ष :

विजयनगर के शासकों ने अपनी रचनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मंदिरों, स्थापत्यों और साहित्य को बढ़ावा दिया साथ ही उत्कृष्टता को शीर्ष तक पहुँचाया । उनकी नीतियां धर्मनिरपेक्ष थी और वे किसी भी प्रकार के सांप्रदायिक विचारों के प्रसार के लिए प्रेरणा नहीं हो सकती। अर्थात विजयनगर की भव्यता भौतिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक से परिपूर्ण थी।