भारत में भारी वर्षा का कारण पश्चिमी विक्षोभ तथा मानसून ट्रफ की अंतः क्रिया

भारत में भारी वर्षा का कारण पश्चिमी विक्षोभ तथा मानसून ट्रफ की अंतः क्रिया

भारत मौसम विज्ञान विभाग (MD) के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ तथा मानसून ट्रफ की अंतः क्रिया (interaction) के कारण भारत में भारी वर्षा हो रही है ।

पश्चिमी विक्षोभ और मानसून ट्रफ के बीच अंतः क्रिया के कारण हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब आदि राज्यों में अत्यधिक भारी वर्षा हो रही है।

मानसून ट्रफ निम्न दाब वाला एक विस्तृत क्षेत्र है। यह पाकिस्तान से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ है।

पश्चिमी विक्षोभ, बहिरुष्ण कटिबंधीय (Extratropical) चक्रवात हैं। ये कैस्पियन सागर या भूमध्य सागर में उत्पन्न होते हैं ।

ये विक्षोभ अधिक ऊंचाई पर बहने वाली पछुआ पवनों के साथ भारत की ओर बढ़ते हुए भूमध्य सागर, काला सागर आदि से नमी धारण कर लेते हैं। जब ये हिमालय से टकराते हैं तो इस क्षेत्र में वर्षा करते हैं।

कभी-कभी, ये उत्तरी पर्वतीय राज्यों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड) के साथ-साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर भी बढ़ जाते हैं।

हालांकि, कई बार ये पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार से होकर दक्षिणी क्षेत्रों की ओर बढ़ जाते हैं।

उत्तर-पश्चिम भारत में अधिकतर शीतकालीन और मानसून – पूर्व वर्षा पश्चिमी विक्षोभों के कारण होती है ।

इस क्षेत्र में सतह के गर्म होने के बाद वायुमंडलीय अस्थिरता उत्पन्न होती है। इसके कारण मानसून – पूर्व वर्षा होती है।

इस वर्ष, लंबे समय तक वर्षा या गरज-चमक के साथ भारी बारिश भी देखने को नहीं मिली है। इसका कारण यह है कि उत्तर भारत में मानसून – पूर्व गतिविधियां आम तौर पर लघु अवधि की तथा अनिरंतर रही हैं।

भारत के कुछ क्षेत्र जहां अत्यधिक वर्षा में वृद्धि हुई है, वे ऐसे स्थान हैं जहां वर्षा वायु के पर्वतों के साथ-साथ ऊपर उठने (Orographic lifting) के कारण होती है।

ओरोग्रफिक वर्षण: वर्षा, हिमपात या अन्य वर्षण तब होता है, जब आर्द्र पवनें किसी पर्वत श्रृंखला के ऊपर से होकर गुजरती हैं।

स्रोत – हिन्दुस्तान टाइम्स

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