मानव तस्करी-रोधी विधेयक का मसौदा (Draft anti-trafficking Bill)

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मानव तस्करी-रोधी विधेयक का मसौदा (Draft anti-trafficking Bill)

मानव तस्करी-रोधी विधेयक का मसौदा (Draft anti-trafficking Bill)

हाल ही में, महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय द्वारा मानव तस्करी (रोकथाम, देखभाल और पुनर्वास) विधेयक, 2021 (Trafficking in Persons (Prevention, Care and Rehabilitation) Bill, 2021) के दस्तावेज पर सभी हितधारकों के सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

विधेयक के प्रमुख बिंदु:

  • प्रस्तावित विधेयक में अपराधियों के लिए कड़ी सज़ा के प्रावधान के साथ ही भारी जुर्माना और उनकी संपत्तियों को जब्त किया जाना भी शामिल है ।
  • इस विधेयक में महिलाओं और बच्चों को सुरक्षा देने के साथ-साथ पीड़ितों के रूप में ट्रांसजेंडर या तस्करी के शिकार किसी अन्य व्यक्ति को भी सम्मिलित किया गया हैं।
  • इस नए मसौदे के अंतर्गतउस प्रावधान को भी समाप्त करने का प्रस्ताव है, जिसके तहत किसी व्यक्ति को ‘पीड़ित’ के रूप में परिभाषित करने हेतु , उसे एक जगह से दूसरे जगह  पर ले जाया जाना आवश्यक होता है।
  • ‘शोषण’ की परिभाषा में, वेश्यावृत्ति के रूप में शोषण अथवा पोर्नोग्राफी जैसे यौन शोषण के अन्य स्वरूपों, शारीरिक शोषण का कोई भी कृत्य, बलात श्रम, दासता या दासता जैसी प्रथाओं, गुलामी या अंगो को जबरन हटवाना आदि को सम्मिलित किया गया है।

यह क़ानून उन सभी व्यक्तियों पर लागू होगा जो

  • भारत की सीमा के अंतर्गत और बाहर रहने वाले सभी नागरिक पर ।
  • भारत में पंजीकृत जहाज या विमान पर यात्रा कर रहे व्यक्ति पर , चाहे वह कहीं भी जा रहा हो या भारतीय नागरिकों को कहीं भी ले जा रहा हो।
  • इस अधिनियम के अंतर्गत अपराध करने के समय भारत में निवास करने वाला कोई भी विदेशी नागरिक या राज्य-हीन (स्टेटलेस) व्यक्ति।
  • सुरक्षा कर्मी और सरकारी कर्मचारी, डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ या प्राधिकार-स्थिति धारण करने वाला कोई भी व्यक्ति।

भारत में तस्करी से संबंधित संवैधानिक और विधायी प्रावधान:

  • अनुच्छेद 23 (1) के अंतर्गत भारत के संविधान के तहत मानव या व्यक्तियों की तस्करी निषिद्ध है।
  • अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम, 1956 (Immoral Traffic (Prevention) Act – ITPA), व्यावसायिक यौन शोषण हेतु तस्करी की रोकथाम के लिए प्रमुख कानून है।
  • आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 2013 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 370 को धारा 370 और 370A IPC से प्रतिस्थापित किया गया है, इसमें मानव तस्करी के खतरे का मुकाबला करने के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं।

‘व्यक्तियों की तस्करी’ रिपोर्ट, 2021 (Trafficking in Persons report 2021)

  • अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी ‘व्यक्तियों की तस्करी रिपोर्ट’ 2021 के अंतर्गत , कोविड महामारी के परिणामस्वरूप मानव तस्करी के प्रति भेद्यता में बढ़ोत्तरी हुई है और इससे वर्तमान तस्करी-रोधी प्रयासों में बाधा आई है।
  • यद्यपि, भारत द्वारा तस्करी को समाप्त करने के लिए न्यूनतम मानक पूरे नहीं किए गए हैं, हालाँकि इस संदर्भ में सरकार महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है। लेकिन सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास, खासकर बंधुआ-मजदूरी के संदर्भ में, अपर्याप्त हैं।

स्रोत – द हिन्दू

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